नई दिल्ली,(ईएमएस)। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन पर शुक्रवार को भी बहस हुई। तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बहस में हिस्सा लेते हुए परिसीमन के विरोध में जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पीकर ओम बिरला को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा में सदस्यों की संख्या 850 होने से बोलने के लिए दोगुना समय चाहिए होगा। इसपर लोकसभा अध्यक्ष ठहाके लगाने लगे और कहा कि सभी को बोलने का उचित समय दिया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए के सामने संख्या बल की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास लोकसभा में दो तिहाई बहुमत नहीं है, जिससे इस अहम संवैधानिक संशोधन बिल को पास कराना विपक्ष के सहयोग या अनुपस्थिति पर निर्भर हो गया है। लोकसभा में एनडीए के पास कुल 293 सांसद हैं, जो सदन का करीब 54 फीसदी है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय और छोटे दलों के सदस्य भी हैं, जिनकी भूमिका इस पूरे गणित में निर्णायक बन सकती है।
नियमों के मुताबिक किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती ह। यदि सभी 540 सदस्य उपस्थित रहते हैं, तो यह आंकड़ा 360 तक पहुंच जाता है। ऐसे में एनडीए को या तो विपक्षी दलों का समर्थन जुटाना होगा या फिर बड़ी संख्या में विपक्षी सांसदों को मतदान से दूर रखना होगा। उदाहरण के तौर पर यदि 30 सांसद मतदान से अनुपस्थित रहते हैं, तो कुल संख्या घटकर 510 हो जाएगी और दो तिहाई बहुमत 340 रह जाएगा। इसी तरह 60 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर यह आंकड़ा 320 और 90 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर 300 तक आ सकता है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बिल को पास कराने के लिए समाजवादी पार्टी (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28) और डीएमके (22) जैसे प्रमुख विपक्षी दलों में से कम से कम दो दलों का समर्थन या उनकी अनुपस्थिति जरूरी होगी। कांग्रेस के पास भी 98 सांसद हैं, जो इस समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं होता है, तो इसे राज्यसभा में पेश ही नहीं किया जाएगा। वहीं राज्यसभा में भी एनडीए के पास 141 सदस्य हैं, जो कुल संख्या का करीब 58 फीसदी हैं, जबकि विपक्ष के पास 83 सदस्य हैं। यहां भी दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों के समर्थन की जरुरत होगी, जिसके लिए बीजेडी, वाईएसआरसीपी, बीएसपी और निर्दलीय सांसदों का रुख निर्णायक साबित हो सकता है। इसी बीच, ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक ने राज्य के हितों की रक्षा के मुद्दे पर अपने सांसदों से एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया, लेकिन 131वें संविधान संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर गंभीर चिंता भी जताई है।

