सोशल मीडिया पर अनफॉलो अभियान से जेन-जेड दे रही है झटका
नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के पूर्व पोस्टर बॉय राघव चड्ढा के लिए भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला डिजिटल मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। चड्ढा, जो अपनी आधुनिक सोच और युवा छवि के लिए जाने जाते थे, इन दिनों सड़कों पर होने वाले प्रदर्शनों के बजाय एक अलग तरह के विरोध का सामना कर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल और उनकी पुरानी पार्टी के समर्थकों ने अब सोशल मीडिया पर अनफॉलो बटन को अपना हथियार बना लिया है। विशेष रूप से जेनरेशन जेड के युवाओं के बीच उनकी घटती लोकप्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है।
एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से राजनेता बने राघव चड्ढा की पहचान हमेशा से एक एक्सेसिबल नेता की रही है। ब्लिंकिट डिलीवरी जैसे रोजमर्रा के उदाहरणों और सामान्य व्यवहार के कारण युवा उन्हें पुराने ढर्रे के राजनेताओं से अलग मानते थे। अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा के साथ उनके विवाह ने उन्हें एक ग्लैमरस पहचान भी दी, जिससे वे युवाओं के लिए एक पड़ोस के लड़के (बॉय नेक्स्ट डोर) वाली छवि में फिट बैठते थे। हालांकि, जानकारों का मानना है कि उनका अचानक पाला बदलना युवाओं को पुरानी और गंदी राजनीति की वापसी जैसा महसूस हुआ है, जिससे उनका मोहभंग हो रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, युवा मतदाताओं में छवि को लेकर बहुत संवेदनशीलता होती है। राजनीति विज्ञान के जानकारों का कहना है कि युवा सांसदों से अक्सर सार्वजनिक नैतिकता और स्वच्छ राजनीति की एक नई संस्कृति लाने की उम्मीद की जाती है। चड्ढा ने अपनी छवि एक ऐसे नेता के रूप में गढ़ी थी जो आम जनता के मुद्दों से सरोकार रखता है, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने उनके समर्थकों को निराश किया है। विशेषकर जेन-जी विश्वासघात या व्यक्तिगत विशेषाधिकार को सुरक्षित रखने वाले राजनीतिक कदमों को आसानी से स्वीकार नहीं करती।
आज के दौर में डिजिटल दुनिया में किसी को अनफॉलो करना केवल एक तकनीकी क्रिया नहीं, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक बयान बन गया है। यह बिना शोर मचाए अपनी असहमति दर्ज कराने का आधुनिक तरीका है। चड्ढा ने जो ऑनलाइन पहचान और साख बनाई थी, अब उसी के कारण उनके हर कदम की सूक्ष्मता से जांच हो रही है। सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट यह स्पष्ट संकेत देती है कि डिजिटल युग में लोकप्रियता जितनी जल्दी मिलती है, उतनी ही जल्दी राजनीतिक निष्ठा बदलने पर छिन भी सकती है। चड्ढा के लिए अब चुनौती अपनी इस खोई हुई डिजिटल साख को फिर से हासिल करने की है।

