भू-माफिया की लूट और जल संकट के खिलाफ महू तहसील पर माकपा का जंगी प्रदर्शन

इंदौर

:: सैकड़ों ग्रामीणों ने घेरा दफ्तर; तहसीलदार को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन, दो दिन बाद स्थानीय मुद्दों पर होगी बैठक ::
इंदौर । मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जन संघर्ष अभियान के तहत बुधवार को डॉ. अंबेडकर नगर (महू) तहसील कार्यालय पर सैकड़ों की तादाद में ग्रामीण महिला-पुरुषों ने एकत्रित होकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नुक्कड़ सभाओं, मोटरसाइकिल जत्थों और पदयात्राओं के बाद आयोजित इस महा-प्रदर्शन में जमीन की लूट, महंगाई, बेरोजगारी और मनरेगा जैसे मुद्दों को लेकर जमकर नारेबाजी की गई।
प्रदर्शन स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए माकपा के जिला सचिव अरुण चौहान और राज्य सचिव मंडल सदस्य कामरेड कैलाश लिंबोडिया ने स्थानीय प्रशासन पर तीखे प्रहार किए। नेताओं ने आरोप लगाया कि महू तहसील में किसानों, दलितों और आदिवासियों की जमीनों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि भू-माफिया और दबंगों को खुली छूट दे रखी है। विकास के नाम पर खेती की जमीनों का रकबा कम कर अवैध रूप से कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, जिसका माकपा पुरजोर विरोध करती है।
वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण अंचल में पीने के पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है और महिलाओं को दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। गैस, पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों और बिजली बिलों में मनमानी लूट से जनता परेशान है। वहीं, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी सत्ता पक्ष के अपने आकाओं को खुश करने के लिए वर्षों से खेती कर रहे गरीब परिवारों को बिना नोटिस बेदखल कर रहे हैं। इसके अलावा मनरेगा के तहत वृक्षारोपण (झाड़-पेड़ लगाने) जैसे कार्यों में भी मजदूरी दर 600 रू. प्रतिदिन करने की मांग उठाई गई। सभा को राजू जरिया, काशीराम नायक, चुन्नी बाई भूरिया, सुखराम वरुड और अर्जुन बारिया ने भी संबोधित किया।
आंदोलन के अंत में प्रधानमंत्री और संभाग आयुक्त के नाम एक विस्तृत ज्ञापन महू तहसीलदार विवेक सोनी को सौंपा गया। ज्ञापन में मनरेगा में 200 दिन का काम, 600 रू. प्रतिदिन मजदूरी, किसानों को एमएसपी की गारंटी, कर्ज माफी और आवास व खेती की जमीन पर मालिकाना हक देने की मांग की गई।
तहसीलदार विवेक सोनी ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य और केंद्र से संबंधित मामलों को तत्काल प्रधानमंत्री और संभाग कार्यालय भेजा जा रहा है। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि दो दिन बाद स्थानीय स्तर की समस्याओं के निराकरण के लिए माकपा कार्यकर्ताओं के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक भी आयोजित की जाएगी।
इस बड़े आंदोलन का नेतृत्व अरुण चौहान, काशीराम नायक, बहादुर भाई, सोहेल खान, देवकरण कोली, चुन्नीबहन भूरिया, मनोहर डाबर, नारायण कोहली, राधेश्याम डाबर, अर्जुन बारिया, हीरालाल चौधरी, ममता सोलंकी, सीताराम भाई, शारदाबाई बामनिया, सुखराम वरुड, छोगालाल कटारे, चंपालाल भाई, भेरूलाल मालवीय, सुभाष कपूर, अजय बुदेल और राजेश मालवीय ने किया।

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