अयोध्या राम मंदिर: सुरक्षा पर 11 माह में 10 करोड़ खर्च, फिर भी चोरी

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-जांच के घेरे में कई बड़े और ताकतवर लोग
अयोध्या । रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर की भव्यता और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के बीच अब सुरक्षा चूक और करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद कथित चोरी का मामला गरमा गया है। बीते 11 महीनों में मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद दान पेटियों में अनियमितता की शिकायत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अब विशेष जांच दल की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और इसका दायरा सिर्फ कथित चोरी तक सीमित न रहकर पूरे सिस्टम को खंगाल रहा है, जिससे कई बड़े नाम जांच के घेरे में आ गए हैं।
17 साल से एक ही जगह तैनात आरएमओ जांच के घेरे में इस जांच में जिस नाम ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वह रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (आरएमओ) का है। यह वही अधिकारी है जिसके जिम्मे मंदिर परिसर की सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं की जिम्मेदारी है। सूत्र बताते हैं कि यह अधिकारी लगभग 17 वर्षों से मंदिर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है और इतने लंबे समय तक उसका तबादला न होना भी जांच के दायरे में है। एसआईटी सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली, रिकॉर्डिंग सिस्टम, बैकअप व्यवस्था, डेटा संरक्षण और तकनीकी नियंत्रण से जुड़े तमाम पहलुओं पर बारीकी से जानकारी जुटा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक परिसरों में से एक, जहां सैकड़ों कैमरे और बहुस्तरीय सुरक्षा मौजूद है, वहां यह चूक आखिर कैसे संभव हुई?
शुरुआत में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर केंद्रित रही यह जांच अब अपना दायरा बढ़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अब उन लोगों की भूमिका भी समझने की कोशिश कर रही है जो मंदिर की सुरक्षा, निगरानी और प्रवेश व्यवस्था से सीधे जुड़े हुए हैं। इसमें तकनीकी स्टाफ, सुरक्षा कर्मी और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांचकर्ताओं का मानना है कि किसी भी बड़े परिसर में होने वाली गतिविधियों को समझने के लिए केवल घटना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का अध्ययन आवश्यक है। यह जांच अब केवल चढ़ावे की कथित चोरी तक सीमित नहीं रही है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र, प्रवेश नियंत्रण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा का विषय बन गई है। 10 करोड़ के सुरक्षा कवच के बावजूद हुई यह सेंधमारी अयोध्या की प्रतिष्ठा और पारदर्शिता पर गहरे सवाल छोड़ रही है, जिसके जवाब आने वाले दिनों में ही सामने आ पाएंगे।
200 लोगों से पूछताछ की तैयारी
200 लोगों से पूछताछ की तैयारी, श्रद्धालुओं के मन में भी सवाल इस मामले में अब तक 125 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और सूत्रों के अनुसार, लगभग 200 लोगों से पूछताछ की योजना पर काम चल रहा है। कई कर्मचारियों को दोबारा बुलाया गया है और उनके बयान फिर से दर्ज किए जा रहे हैं, जो जांच की गंभीरता को दर्शाता है। रामनगरी में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी इस मामले की चर्चा साफ सुनाई दे रही है और उनके मन में भी यही सवाल है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित और सुरक्षित धार्मिक स्थलों में से एक में ऐसी स्थिति कैसे पैदा हुई।

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