उज्जयिनी में महाकाल की कृपा से फिर लौटेगा विक्रमादित्य कालीन वैभव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्य प्रदेश

:: सिंहस्थ-2028 की तैयारी : ₹25,000 करोड़ से संवर रही बुनियादी संरचना, 40 करोड़ श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान ::
उज्जैन/इंदौर । धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े महासंगम सिंहस्थ-2028 को भव्य, दिव्य और नव्य स्वरूप देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प विषयक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला में स्पष्ट किया कि इस बार का सिंहस्थ वैश्विक स्तर पर एक नई मिसाल कायम करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जो सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विरासत से विकास का अनुष्ठान चल रहा है, उज्जैन का यह महाआयोजन उसी की एक स्वर्णिम कड़ी है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ के ध्येय वाक्य के साथ हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सुगमता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
:: हर दिन 4 करोड़ श्रद्धालु कर सकेंगे अमृत स्नान ::
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर अधोसंरचना विकास पर केंद्रित एक प्रभावी लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। डॉ. यादव ने बताया कि आगामी सिंहस्थ में देश-विदेश से करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। मां क्षिप्रा के पावन आंचल में हर 24 घंटे में करीब 4 करोड़ श्रद्धालु पूरी पवित्रता के साथ अमृत स्नान कर सकेंगे। इसके लिए उज्जैन सहित आस-पास के सीमावर्ती जिलों में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य गति पकड़ चुके हैं। इन कार्यों के पूर्ण होते ही उज्जैन पुनः सम्राट विक्रमादित्य के काल के गौरव और आर्थिक-आध्यात्मिक समृद्धि के नए युग में प्रवेश करेगा।
:: क्षिप्रा तट से लेकर आसमान तक… ऐसा है विकास का खाका ::
सिंहस्थ को निर्विघ्न और सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए सरकार सड़क, रेल और हवाई मार्ग का जाल बिछा रही है। प्रमुख अधोसंरचना कार्यों का विवरण इस प्रकार है:

  • घाटों का कायाकल्प और अविरल धारा : मां क्षिप्रा के दोनों तटों पर 778 करोड़ रुपये की लागत से 29 किलोमीटर से अधिक लंबे नए पक्के घाट बनाए जा रहे हैं, जिससे मिट्टी का कटाव रुकेगा। वहीं, पुराने 7.8 किमी के स्थायी घाटों के उन्नयन पर 120 करोड़ रुपये खर्च होंगे। क्षिप्रा में पानी की अविरल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
  • 22 नए पुलों का संजाल : मेला क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण और आंतरिक यातायात को सुगम रखने के लिए 853.46 करोड़ रुपये की लागत से 22 नए पुल और रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) बनाए जा रहे हैं। इनमें 17 पुल सीधे नदी पर और 5 रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं।
  • फोरलेन और सिक्सलेन की कनेक्टिविटी : उज्जैन को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है। 1,692 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन 6-लेन मार्ग लगभग पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त उज्जैन-जावरा मार्ग (₹5,017 करोड़), उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग (₹2,935 करोड़), उज्जैन-झालावाड़ (₹2,523 करोड़) और उज्जैन-गरोठ मार्ग (₹2,660 करोड़) के जरिए कनेक्टिविटी को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है।
  • हवाई और रेल यातायात : रेलवे द्वारा सिंहस्थ के दौरान 236 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, साथ ही उज्जैन और चिंतामन सहित 7 स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। वायु मार्ग के लिए उज्जैन-देवास रोड पर 457 एकड़ में नवीन हवाई अड्डे का निर्माण और सदावल में 13.45 करोड़ रुपये की लागत से 4 आधुनिक हेलीपैड तैयार किए जा रहे हैं।
    :: एआई तकनीक और डिजिटल कमांड सेंटर संभालेंगे सुरक्षा ::
    आधुनिक दौर के इस सिंहस्थ में सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद हाईटेक होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि 139 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक केंद्रीय डिजिटल कमांड सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह सेंटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित भीड़ प्रबंधन, रीयल-टाइम ट्रैफिक कंट्रोल और पूरे मेला क्षेत्र की सीसीटीवी कैमरों के जरिए एकीकृत निगरानी (एकीकृत सर्विलांस) करेगा। आपदा प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा के लिए अमले को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
    :: स्वयंसेवक से मुख्यमंत्री तक का सफर ::
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भावुक होते हुए अपने पुराने संस्मरण भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1980 के सिंहस्थ में उन्होंने स्वयं एक स्काउट एंड गाइड वॉलेंटियर के रूप में श्रद्धालुओं की सेवा की थी। इसके बाद 1992 के सिंहस्थ में उन्हें समितियों की बैठकों में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पहले साधु-संतों और श्रद्धालुओं को ठहराना एक बड़ी चुनौती होती थी, लेकिन अब होटल निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से परिस्थितियां बदली हैं। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही समाज के हर वर्ग और अनुभवी लोगों को शामिल कर सिंहस्थ समितियों का गठन किया जाएगा।
    :: टीम वर्क ही सफलता की कुंजी ::
    कार्यशाला में उज्जैन के कमिश्नर एवं मेलाधिकारी आशीष सिंह ने आगामी तैयारियों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इस उच्च स्तरीय बैठक में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, स्थानीय विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित पूर्व के सिंहस्थ आयोजनों में अपनी सेवाएं दे चुके कई सेवानिवृत्त एवं वर्तमान वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) उज्जैन रेंज, राकेश गुप्ता ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।