-सिंगापुर के साथ किया रक्षा सौदा, अब चीन के मलक्का जलडमरूमध्य पर होगी नजर
सिंगापुर । मॉरीशस, म्यांमार और थाईलैंड जैसे हिंद महासागर के बड़े प्लेयर्स के साथ भारत की डिफेंस डील तो पहले ही हो चुकी है। अब भारत के पाले में चीन का सबसे बड़ा पार्टनर सिंगापुर भी आ गया है। हाल ही में भारतीय नौसेना ने सिंगापुर के साथ एक बड़ा रक्षा सौदा किया है। इसके तहत भारत ने पाया लेबार एयरबेस पर अपना घातक पी-8आई विमान तैनात कर दिया है। भारत के इस मास्टर-स्ट्रोक से चीन की सबसे बड़ी कमजोरी यानी मलक्का जलडमरूमध्य का समुद्री रास्ता अब पूरी तरह भारत की पैनी नजर में आ गया है, जहां से चीन की करीब 80फीसदी लाइफलाइन और सप्लाई गुजरती है।
भारतीय नौसेना और सिंगापुर की नौसेना ने समुद्री निगरानी विमान के संचालन से जुड़े विषयों पर सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज (एसएमईई) कार्यक्रम में हिस्सा लिया। ये कार्यक्रम भारतीय नौसेना के पी-8आई विमान के सिंगापुर के पाया लेबार एयरबेस दौरे के दौरान आयोजित किया गया। इस इवेंट के बाद सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर लिखा- भारत और सिंगापुर के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। भारतीय नौसेना और सिंगापुर की नौसेना के विशेषज्ञों ने पी-8 आई विमान के पाया लेबार एयरबेस पहुंचने के दौरान समुद्री निगरानी विमान के संचालन पर एसएमईई कार्यक्रम में भाग लिया।
पिछले हफ्ते सिंगापुर के भारत में उच्चायुक्त साइमन वोंग ने भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि से मुलाकात की थी। दोनों ने भारत और सिंगापुर की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, आपसी आदान-प्रदान और पहले से चल रहे संवाद जैसे रक्षा सहयोग के मुद्दों पर चर्चा की। इस मुलाकात में साइमन वोंग ने जनरल सुब्रमणि को सीडीएस बनने पर बधाई भी दी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा- मंगलवार को भारतीय सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन एस राजा सुब्रमणि से मुलाकात हुई। उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। हमने दोनों देशों की सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग, बड़े सैन्य अभ्यासों, आदान-प्रदान और नियमित बैठकों पर बात की।
पिछले महीने सिंगापुर में भारत-सिंगापुर रक्षा नीति वार्ता का 16वां दौर आयोजित हुआ। इसमें भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सिंगापुर के रक्षा मंत्रालय के स्थायी सचिव जोसेफ लिओंग ने संयुक्त रूप से बैठक की अध्यक्षता की। दोनों अधिकारियों ने सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग, कैपेसिटी बिल्डिंग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने और आपसी हित वाले नए क्षेत्रों, खासकर रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर भी बातचीत हुई।

