नई दिल्ली । भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने हाल ही में बंगाल की खाड़ी में अपनी निर्धारित स्थिति से बहकर 150 किलोमीटर से अधिक दूर जा चुकी एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा बॉय को सफलतापूर्वक सुरक्षित किया है। बेहद चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों के बीच चलाए गए अभियान को तटरक्षक जहाज रानी गैदिन्लियू ने पूरा किया, जो समुद्र में वैज्ञानिक उपकरणों की सुरक्षा के प्रति बल की अदम्य साहस को दिखाता है।
एमओईएस-एनआईओटी से संबंधित डेटा बॉय आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तट के पास से बह गई थी। यह उपकरण समुद्री वातावरण से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े, जैसे समुद्र की लहरों, तापमान, धाराओं और मौसम संबंधी जानकारी एकत्र करता है। ये आंकड़े मौसम पूर्वानुमान, समुद्री अनुसंधान, तटीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समुद्र में तेज हवाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद, तटरक्षक दल ने सटीक खोज अभियान चलाकर इस बहुमूल्य वैज्ञानिक उपकरण को सुरक्षित बचाया। तटरक्षक बल ने स्पष्ट किया है कि उसका दायित्व केवल समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव या प्रदूषण नियंत्रण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह समुद्र में स्थापित वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस प्रकार के अभियान देश की समुद्री वैज्ञानिक गतिविधियों को निरंतर समर्थन देते हैं और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
यह अभियान तब हुआ है जब बीते सप्ताह ही भारतीय तटरक्षक बल ने अद्भुत साहस और तत्परता दिखाकर छह मछुआरों की जान बचाई थी। 29 जून की शाम को कर्नाटक के मंगलूरु तट के पास मछली पकड़ने वाली नौका ‘मंजू माथा’ संकट में फंस गई थी। सुरथकल तट से करीब 33 समुद्री मील दूर, तेज लहरों और हवाओं के कारण नौका में पानी भरने लगा और उसके ढांचे को नुकसान पहुंचा, जिससे छह मछुआरों की जान खतरे में पड़ गई थी। संदेश मिलते ही, तटरक्षक बल ने अपने पोत को बिना समय गंवाए संकटग्रस्त नौका की ओर मोड़ा और महज 90 मिनट के भीतर बचाव दल मौके पर पहुंच गया। ऊंची लहरें, तेज हवाएं, कम दृश्यता और बढ़ता अंधेरा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, तटरक्षक बल के जवानों ने धैर्य और कुशलता का परिचय दिया।

