देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययनशाला के विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, चाणक्य सभागृह का लोकार्पण ::
इंदौर । भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और इसी दिशा में देश विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार ने मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कही।
मंत्री परमार खंडवा रोड स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययनशाला की प्रथम बैच के पाठ्यक्रम पूर्णता समारोह और नवनिर्मित सभागृह के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान परंपरा से जुड़ी हुई है। इसमें आध्यात्म और विज्ञान का बेहतर समन्वय किया गया है, जो विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. राकेश सिंघई और कुलसचिव प्रज्जवल खरे सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
:: भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में स्थान देने पर जोर ::
मंत्री परमार ने कहा कि भारत की संस्कृति में प्रकृति संरक्षण की भावना सदियों से रही है। सूर्य, चंद्रमा, नदी, पर्वत, वृक्ष और वनस्पतियों के प्रति सम्मान हमारी परंपरा का हिस्सा है, जिसका वैज्ञानिक आधार भी है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज आज भी प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की सीख देता है।
उन्होंने कहा कि भारत में चाणक्य, बोधायन और आर्यभट्ट जैसे महान विद्वान हुए हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है और आने वाले समय में भारत ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनेगा।
:: रील नहीं, इतिहास बनाने का लक्ष्य रखें युवा : पटेल
सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के सामने रील बनाने और इतिहास बनाने, दोनों के विकल्प हैं। विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य तय कर मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराएं गौरवशाली हैं। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का जनजातीय अध्ययन केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
:: ज्ञान को समाज के हित में उपयोग करें विद्यार्थी : सिंघई
कुलगुरु प्रो. डॉ. राकेश सिंघई ने कहा कि उपाधि केवल प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को ज्ञान देता है, लेकिन उस ज्ञान का उपयोग समाज के विकास में करना विद्यार्थियों का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने उच्च शिक्षा को नई दिशा दी है। अब विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो अनुसंधान, नवाचार और तकनीक के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान कर सकें।
:: चाणक्य सभागृह का किया लोकार्पण ::
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित सभागृह का लोकार्पण किया। मंत्री परमार ने बताया कि इस सभागृह का नाम महान अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य के नाम पर रखा गया है।
इस अवसर पर जनजातीय अध्ययनशाला और वाणिज्य अध्ययनशाला के सैकड़ों छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। मंत्री परमार ने परिसर में पौधारोपण भी किया। कार्यक्रम में शिक्षाविद्, प्रोफेसर, विद्यार्थी और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

