यूएई का मास्टरप्लान: नए बंदरगाह से बदलेगा खाड़ी व्यापार

अंतरराष्ट्रीय

होर्मुज की निर्भरता कम करने की तैयारी
दुबई । ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक व्यापार के लिए एक नया और संवेदनशील मोर्चा बना दिया है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक वर्चस्व की होड़ में, दुनिया के कई देशों की तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कुछ स्थानों पर किल्लत जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए, भारत के करीबी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है, जिसके तहत अगले 18 महीनों में होर्मुज की निर्भरता को खत्म करने और तेल आपूर्ति के लिए एक नया, सुरक्षित विकल्प खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दुबई की दिग्गज लॉजिस्टिक्स कंपनी डीपी वर्ल्ड अब होर्मुज स्ट्रेट के खतरे को स्थायी रूप से टालने की तैयारी में है। यूएई इसके लिए अपने पूर्वी तट पर एक बिल्कुल नया, आधुनिक और हाईटेक बंदरगाह तथा विशाल कंटेनर टर्मिनल बनाने की तैयारी में जुट गया है। इस रणनीतिक मास्टरप्लान का सीधा मकसद दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक जेबेल अली पर अपनी निर्भरता को कम करना है, ताकि होर्मुज के संकरे रास्ते में ईरान जब चाहे तब बाधा न डाल सके। जब से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की धमकी दी है, तब से खाड़ी देशों का समुद्री व्यापार काफी प्रभावित हुआ है। मध्य पूर्व के सबसे बड़े और दुबई की आर्थिक शक्ति माने जाने वाले जेबेल अली पोर्ट पर व्यापारिक गतिविधियों में 90 से 95 प्रतिशत की भारी और ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस विशाल पोर्ट पर अब बड़े मालवाहक जहाजों का आना-जाना लगभग पूरी तरह ठप हो चुका है। जेबेल अली सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि पूरी दुबई की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए इस भयानक नाकेबंदी ने यूएई की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी बड़े संकट से निपटने के लिए अब यूएई ने होर्मुज के उस पार, सीधे ओमान की खाड़ी से लगते अपने पूर्वी तट पर मौजूद फुजैरा में एक नया मल्टीपर्पज पोर्ट बनाने की योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।
डीपी वर्ल्ड के इस नए मास्टरप्लान को लेकर दुनिया भर के कूटनीतिक और व्यावसायिक गलियारों में भारी हलचल है। इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का दावा है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां और फंडिंग योजना के अनुसार रहीं, तो यह नया पोर्ट और हाईटेक टर्मिनल मात्र 18 महीने के रिकॉर्ड समय में बनकर पूरी तरह तैयार हो सकता है। हालांकि, इसके अंतिम डिजाइन और बड़े वित्तीय इंतजामों पर अभी भी अंतिम दौर की बातचीत चल रही है। यूएई के शीर्ष अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस नए वैकल्पिक पोर्ट को बनाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जेबेल अली का महत्व खत्म हो जाएगा, बल्कि जेबेल अली वैश्विक व्यापार में अपना कद हमेशा बनाए रखेगा। जब से होर्मुज में तनाव बढ़ा है, डीपी वर्ल्ड ने मजबूरी में अपने ज्यादातर कार्गो जहाजों को जेबेल अली से हटाकर पूर्वी तट पर मौजूद फुजैरा और उसके पास के खोर फक्कन पोर्ट्स की तरफ मोड़ दिया है, जिससे वहां के समुद्र में जहाजों का भारी जाम लग गया है, जिसे दूर करना अब यूएई के लिए एक बड़ी चुनौती है।यूएई द्वारा इस नए पोर्ट को बनाने की इतनी बड़ी जल्दबाजी के पीछे सिर्फ व्यापारिक घाटा या आर्थिक नुकसान ही एकमात्र वजह नहीं है, बल्कि सुरक्षा का एक बहुत बड़ा कारण भी छिपा हुआ है। ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने सीधे यूएई की तरफ लगभग 3,000 घातक ड्रोन और विनाशकारी मिसाइलें दागी हैं। पश्चिम एशिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले अकेले यूएई ने इस जंग में सबसे ज्यादा आसमानी हमलों का सामना किया है।