विवाद के बाद सेना प्रमुख के दफ्तर से हटाई गई नई पेंटिंग

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अब लगा सेना का प्रतीक चिह्न
नई दिल्ली । भारतीय सेना प्रमुख के साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय (लाउंज) के बैकड्रॉप में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। पिछले कुछ समय से सैन्य दिग्गजों के बीच विवाद का कारण बनी पेंटिंग को वहां से हटा दिया गया है। आगामी 135वें डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट को लेकर जारी सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के एक वीडियो संदेश में यह बदलाव देखा गया। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि उनके कार्यालय की लकड़ी के पैनल वाली दीवार पर अब उस विवादित पेंटिंग की जगह भारतीय सेना का प्रतीक चिह्न स्थापित कर दिया गया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब दिसंबर 2024 में सेना प्रमुख के लाउंज से 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ढाका में हुए ऐतिहासिक सरेंडर वाली पेंटिंग को हटाकर एक नई कलाकृति लगा दी गई थी। हटाई गई पुरानी पेंटिंग में पाकिस्तानी जनरल ए.ए.के. नियाजी को आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए दिखाया गया था। इसकी जगह जो नई पेंटिंग लगाई गई थी, उसमें पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के किनारे सेना के टैंक, आसमान में हथियारबंद हेलिकॉप्टर, रथ हांकते भगवान कृष्ण और एलएसी की ओर इशारा करते चाणक्य को चित्रित किया गया था। भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली क्षण को दर्शाने वाली तस्वीर को हटाए जाने पर कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कड़ा ऐतराज जताया था।
विवाद बढ़ने के बाद, 1971 के सरेंडर वाली मूल पेंटिंग को दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया था। उस समय तर्क दिया गया था कि सेना प्रमुख के दफ्तर की तुलना में मानेकशॉ सेंटर में तीनों सेनाओं के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम होते हैं, जिससे अधिक से अधिक लोग और विदेशी मेहमान उस ऐतिहासिक धरोहर का दीदार कर सकेंगे। हालांकि, अब विवादित पेंटिंग को भी हटाकर वहां केवल भारतीय सेना का आधिकारिक प्रतीक चिह्न लगाने के फैसले का पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खुलकर स्वागत किया है। पूर्व नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एच.एस. पनाग सहित कई दिग्गजों ने इस कदम की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि यह बदलाव भविष्य में 1971 के ऐतिहासिक आत्मसमर्पण वाली पेंटिंग को पुनः उसी स्थान पर सम्मानपूर्वक वापस लाने की दिशा में पहला कदम साबित होगा।