नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार द्वारा उनकी सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार करने के बाद समाप्त हो गई है। सीजेपी ने सरकार के साथ एक साझा प्रेसवार्ता में इसकी घोषणा की। बीजेपी नेता प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजते हुए एक्स पर लिखा कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम पर दुख व्यक्त कर व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं बताया। प्रधान ने कहा कि उनका संकल्प है कि देश की युवा शक्ति भ्रम के कुचक्र में न फंसे और राष्ट्रविरोधी ताकतें मौजूदा स्थिति का लाभ न उठाएं। उन्होंने छात्रों से पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह कर देश की एकता और छात्रों के भविष्य को कानूनी पेचीदगियों से बचाने के लिए यह कदम उठाया। प्रधान के इस्तीफे के बाद, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दो अतिरिक्त मांगें रखी थीं कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और 20 तारीख को पुलिस की कार्रवाई में शामिल कर्मियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएं। केंद्र सरकार और सीजेपी के बीच हुई साझा प्रेसवार्ता में इन मांगों पर भी सहमति बनी। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली में दर्ज 15-20 एफआईआर वापस लेगी और भविष्य में सीजेपी टीम पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जिसकी लिखित गारंटी मंगलवार तक दी जाएगी। आशुतोष रंका ने पुष्टि की कि एक करोड़ रुपये के मुआवजे पर भी सहमति बन गई है, जो नियमों के तहत जल्द दिया जाएगा। प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की, जबकि गृहमंत्री अमित शाह प्रधानमंत्री मोदी से मिलने पहुंचे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी दिल्ली के लिए रवाना हुए।

