आचार्य समयसागर जी बोले, गुरु आराधना से ही जीवन होता है धन्य, अहंकार है सबसे बड़ा शत्रु
-1500 छात्राओं ने प्रस्तुत की भव्य गुरु पूजन
भोपाल । राजधानी स्थित श्री विद्योदय तीर्थ, एमपी नगर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही तीर्थ परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। गुरु वंदना, पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपूर्ण वातावरण गुरुभक्ति के रंग में सराबोर दिखाई दिया।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण प्रतिभास्थली की लगभग 1500 छात्राओं द्वारा प्रस्तुत भव्य गुरु पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा। छात्राओं ने अनुशासित और भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया। उनकी श्रद्धा और समर्पण से परिपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
गुरु आराधना से मिलता है सम्यक् ज्ञान: आचार्य समयसागर
अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु आराधना परोक्ष और अपरोक्ष दोनों रूपों में संभव है। श्रद्धा, निर्मल भाव और शुद्ध मन ही सच्ची गुरु भक्ति का आधार हैं। उन्होंने कहा कि मन का सदुपयोग व्यक्ति को प्रभु और गुरु से जोड़ता है, जबकि मोह और अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनते हैं।
अहंकार से बचने और गुणों को अपनाने का संदेश
आचार्य श्री ने कहा कि मान (अहंकार) क्रोध से भी अधिक घातक होता है। अहंकारी व्यक्ति दूसरों के गुणों को स्वीकार नहीं कर पाता। उन्होंने प्रेरित किया कि प्रत्येक व्यक्ति दूसरों के छोटे-से-छोटे गुण को भी पर्वत के समान बड़ा मानकर उसका सम्मान करे। सम्मान पाने की लालसा भी लोभ का ही स्वरूप है, इसलिए विनम्रता ही जीवन का वास्तविक आभूषण है।
गुरु स्मरण ही जीवन का सच्चा उत्सव
आचार्य श्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु स्मरण और गुरु आराधना का अखंड भाव है। जिसके हृदय में गुरु का वास होता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है और वही मोक्षमार्ग का अधिकारी बनता है। कार्यक्रम में भोपाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरा तीर्थक्षेत्र धर्म, भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित रहा।

