इन्दौर शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय किला भवन इंदौर के स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के तत्वावधान में “स्वरोजगार एवं सूक्ष्म उद्यमिता विकास” विषय पर जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. डी. श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विद्यार्थियों को रोजगार की अपेक्षा स्वरोजगार की ओर अग्रसर होने तथा उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया। इसके पश्चात अतिरिक्त संचालक महोदया ने कार्यशाला का उद्घाटन कर विद्यार्थियों को शासन की विभिन्न उद्यमिता योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य सत्र में अतिरिक्त संचालक श्रीमती किरण सहुजा, मध्यप्रदेश लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष राजेश मिश्रा, महिला प्रभारी श्रीमती सीमा मिश्रा, एमएसएमई इंदौर के डीआरएफ अधिकारी गौरव गोयल, जिला उद्योग केंद्र (DIC) इंदौर के महाप्रबंधक स्वप्निल गर्ग तथा एलडीएम, बैंक ऑफ इंडिया इंदौर के आशीष कटियार ने स्वरोजगार, सूक्ष्म उद्योग स्थापना, स्टार्टअप, वित्तीय सहायता, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं एवं उद्यम स्थापना की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में जिला उद्योग केंद्र (DIC) इंदौर के महाप्रबंधक स्वप्निल गर्ग ने प्रतिभागियों को स्टार्टअप आइडिया विकसित करने, बिजनेस प्रपोजल का मूल्यांकन, सरकारी योजनाओं से जोड़ने, नवाचार को बढ़ावा देने, उद्यमिता विकास गतिविधियों को मजबूत करने तथा उद्योग-जगत से संपर्क स्थापित करने के उपाय बताए । साथ ही व्यवसाय नियोजन, छात्र मार्गदर्शन एवं उद्योगों से समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई।कार्यक्रम में बैंक ऑफ इंडिया इंदौर के आशीष कटियार ने विद्यार्थियों को वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल लिटरेसी), बैंक ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों की तैयारी तथा उद्यम स्थापना के लिए जरूरी औपचारिकताओं से भी अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि सही योजना, उचित वित्तीय प्रबंधन और शासकीय योजनाओं के सहयोग से युवा सफल उद्यमी बन सकते हैं।
कार्यशाला के दौरान तैयार उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग), बिक्री के आधुनिक माध्यमों, डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग तथा बाजार से जुड़ने की रणनीतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
स्वामी विवेकानंद कैरियर गाइडेंस प्रकोष्ठ की संभागीय नोडल अधिकारी डॉ मनीषा पांडे ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप रोजगार के साथ-साथ रोजगार सृजन की अवधारणा पर प्रकाश डाला । विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने उद्यमिता, स्टार्टअप को भविष्य का सशक्त करियर विकल्प बताया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा विभाग इंदौर संभाग की अतिरिक्त संचालक डॉ. किरणबाला सालूजा ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, नवाचारी और रोजगार सृजक बनाना है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में संचालित स्वरोजगार एवं स्टार्टअप आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में उद्यमिता की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारियों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं, स्टार्टअप, एमएसएमई तथा बैंकिंग सुविधाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनने के लिए प्रेरित करें। साथ ही उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन पर आयोजकों को शुभकामनाएँ देते हुए प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मध्यप्रदेश लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में स्वरोजगार ही आत्मनिर्भरता का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि एक सफल उद्यमी बनने के लिए नवाचार, दृढ़ संकल्प, उचित व्यवसाय योजना तथा सतत प्रयास आवश्यक हैं। स्वरोजगार या उद्योग प्रारंभ करने से पहले जिस क्षेत्र में कार्य करना है, उसकी गहन जानकारी प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिना योजना और जानकारी के व्यवसाय शुरू करने के बजाय पहले संबंधित क्षेत्र का प्रशिक्षण प्राप्त करें, बाजार की मांग, उपलब्ध संसाधन, निवेश की आवश्यकता तथा परियोजना (प्रोजेक्ट) की लागत का समुचित अध्ययन करें। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण एवं तकनीकी सहायता की जानकारी लेकर सुविचारित योजना के साथ उद्योग की शुरुआत करें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सही तैयारी, कौशल और आत्मविश्वास के साथ किया गया प्रयास ही सफल उद्यमिता की आधारशिला बनता है।
लघु उद्योग भारती की महिला विंग की कार्यकारी सदस्य एवं आयविर्त फाउंडेशन की डायरेक्टर सुश्री सीमा मिश्रा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि किसी भी व्यवसाय की शुरुआत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पूंजी आत्मविश्वास है। यदि व्यक्ति में स्वयं पर विश्वास, स्पष्ट लक्ष्य और दृढ़ संकल्प हो, तो सीमित संसाधनों के साथ भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप व्यवसाय का चयन करने, निरंतर सीखने, जोखिम उठाने का साहस विकसित करने तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, सही योजना और सतत प्रयास ही सफल उद्यमिता की मजबूत नींव हैं।
स्टार्टअप विशेषज्ञ सुदीप शहाणे ने अपने व्याख्यान में कहा कि किसी भी सफल व्यवसाय की शुरुआत एक सशक्त विचार (बिजनेस आइडिया) से होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने व्यवसायिक विचार को सीधे लोगों के बीच लेकर जाएँ, संभावित ग्राहकों से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं को समझें। इसके बाद अपने आइडिया का वैलिडेशन (सत्यापन) एवं असेसमेंट (मूल्यांकन) करें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उत्पाद या सेवा की वास्तविक बाजार में मांग है। उन्होंने कहा कि वैलिडेशन के बाद उत्पाद (प्रोडक्ट) को बाजार में लॉन्च करने की रणनीति तैयार करें तथा व्यवसाय के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों, निवेश, विपणन और विस्तार की योजना बनाकर चरणबद्ध तरीके से कार्य करें। श्री सिंहाड़े ने कहा कि सही योजना, बाजार की समझ और ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर विकसित किया गया स्टार्टअप सफलता की अधिक संभावनाएँ रखता है।
द्वितीय सत्र में सेल्फ एम्प्लॉयमेंट एवं माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट विषय पर परिचर्चा एवं प्रश्नोत्तरी का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी, कैरियर काउंसलर तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यशाला के दौरान लघु उद्योग भारती एवं एमएसएमई द्वारा प्रस्तुत स्टार्टअप एवं बिजनेस प्रपोजल का मूल्यांकन किया गया। इनमें से तीन प्रपोजल का चयन किया गया, जिनमें दो प्रस्ताव शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय इंदौर तथा एक प्रस्ताव शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय इंदौर का रहा। चयनित प्रपोजलों को विशेषज्ञों ने सराहा तथा उन्हें आगे के मार्गदर्शन, मेंटरशिप एवं व्यवसाय स्थापना हेतु आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. डी. श्रीवास्तव के संरक्षण में आयोजित इस कार्यशाला का संयोजन जिला नोडल अधिकारी डॉ. सीमा तिवारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी प्रो. कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के सदस्य एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक और विद्यार्थियों उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जिला नोडल अधिकारी डॉ. सीमा तिवारी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।

