नई दिल्ली । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल को पुणे में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। इस मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। सम्मान स्वरूप डोभाल को पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, स्मृति चिह्न, चेक और गीता रहस्य की प्रति भेंट की गई। सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में डोभाल ने युवाओं को आजादी का सही अर्थ समझने का महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसमें उन्होंने देशहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।
एनएसए डोभाल ने स्पष्ट किया कि आजादी का मतलब मनमर्जी या कुछ भी करना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सोच बिल्कुल गलत है और हर नागरिक को सबसे पहले सिर्फ देशहित के बारे में सोचना चाहिए। डोभाल ने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी इसतरह के रास्ते पर न बढ़ें जो राष्ट्रहित के खिलाफ हो, क्योंकि भारत को शक्तिशाली बनाना हम सभी का पहला कर्तव्य है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत वर्तमान में आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों से निपट रहा है, और देश की तीव्र प्रगति से कुछ विरोधी ताकतें परेशान हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मजबूत नेतृत्व की सराहना कर कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि देश को ऐसा नेतृत्व मिला है। डोभाल ने लोकमान्य तिलक को याद कर बताया कि उन्होंने पुणे में अपनी शुरुआती पढ़ाई के दौरान ही तिलक के विचारों को विस्तार से जाना था। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अंग्रेजों के शासन में निडर होकर आवाज बुलंद करने और जेल में रहकर भी समाज सेवा का मार्ग न छोड़ने वाले तिलक जी के जीवन और संघर्षों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।

