:: जन आयोग की रिपोर्ट का दावा- विकास के लक्ष्यों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर; पुनर्वास, सिंचाई और पर्यावरण पर गंभीर चिंता ::
इंदौर । नर्मदा घाटी की महत्वाकांक्षी सरदार सरोवर परियोजना को लेकर स्वतंत्र जन आयोग की रिपोर्ट ने विकास के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आयोग ने पुनर्निरीक्षण और पुनर्मूल्यांकन के बाद जारी रिपोर्ट में दावा किया है कि 45 साल बाद भी बिजली, सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने के मूल लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सके हैं।
जन आयोग ने आज इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकारों के समक्ष अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में परियोजना के पुनर्वास, पर्यावरणीय प्रभाव, आर्थिक उपयोगिता और प्रभावित समुदायों के अधिकारों को लेकर चिंता जताई गई है।
महाराष्ट्र की जल बिरादरी, ओडिशा की डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट और हिमाचल प्रदेश की हिमधारा जैसी सामाजिक संस्थाओं ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश की अध्यक्षता में जन आयोग का गठन किया था। मानवाधिकार विशेषज्ञ इनाक्शी गांगुली और पर्यावरणविद डॉ. गोर्की चक्रवर्ती आयोग के सदस्य रहे।
:: 5 हजार किमी नहरें अधूरी, सिंचाई पर सवाल ::
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में करीब 5,000 किलोमीटर नहरों का निर्माण अब भी बाकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्छ और सौराष्ट्र के कई क्षेत्रों में किसान सिंचाई जल की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं। आयोग ने जल वितरण में उद्योगों और बड़े शहरों को प्राथमिकता दिए जाने की शिकायतों की समीक्षा की मांग की है।
:: 15,946 परिवारों को सूची से बाहर करने का आरोप ::
रिपोर्ट में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के हजारों प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की स्थिति पर चिंता जताई गई है। आयोग के अनुसार मध्यप्रदेश में बैकवॉटर लेवल में बदलाव के कारण 15,946 परिवारों को प्रभावित सूची से बाहर कर दिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 की बाढ़ के दौरान सामने आए हालात ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। झा आयोग की जांच का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 186 अधिकारियों और दलालों को दोषी पाए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
:: नर्मदा और आदिवासी अधिकारों पर चिंता ::
जन आयोग की रिपोर्ट में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और पर्यटन योजनाओं के कारण आदिवासी समुदायों के पेसा अधिकारों पर असर पड़ने की बात कही गई है। रिपोर्ट में अवैध रेत खनन और औद्योगिक प्रदूषण को नर्मदा नदी के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।
आयोग ने नर्मदा संरक्षण के लिए प्रभावी निगरानी और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता बताई है।
:: 4,200 करोड़ से 75 हजार करोड़ से अधिक पहुंची लागत ::
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1983 में करीब 4,200 करोड़ रुपये अनुमानित लागत वाली सरदार सरोवर परियोजना पर अब तक 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। आयोग ने परियोजना की वास्तविक आर्थिक उपयोगिता का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने की सिफारिश की है।
:: आयोग की प्रमुख सिफारिशें ::
- परियोजना की लागत, लाभ और सामाजिक प्रभावों का स्वतंत्र संस्था से पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।
- प्रभावित और सूची से बाहर किए गए विस्थापित परिवारों को पुनर्वास व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- भविष्य की बड़ी परियोजनाओं के लिए स्वतंत्र राष्ट्रीय विस्थापित पुनर्वास आयोग बनाया जाए।
- नर्मदा में अवैध रेत खनन और औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
- जलाशय में प्रस्तावित पर्यटन क्रूज सहित पर्यावरण प्रभावित योजनाओं की समीक्षा की जाए।
:: विकास मॉडल पर बहस की जरूरत ::
आयोग ने बड़े और केंद्रीकृत विकास मॉडल की जगह विकेंद्रीकृत और लोकतांत्रिक विकास व्यवस्था अपनाने पर जोर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी परियोजना की सफलता का आकलन केवल निर्माण और निवेश से नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के जीवन में आए बदलाव से किया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता में राकेश दीवान और कुमार सिद्धार्थ सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। रिपोर्ट जारी होने के बाद अब सरकार और संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

