बिना सुरक्षा उपकरणों के सेप्टिक टैंक में उतारना मौत के कुएं में कूदने जैसा

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जंतर मंतर पर सफाईकर्मियों का प्रदर्शन, पुनर्वास कानून लागू करने की मांग
नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर सफाई कर्मचारियों, उनके परिवारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथ से मैला उठाने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम को देश में सख्ती से लागू करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल कई पीड़ित परिवार सिर पर हमें मारना बंद करो लिखी पट्टियां बांधकर पहुंचे थे, जो सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान अपनों को खोने का दर्द बयां कर रही थीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन में शामिल हुई एक महिला ने अपने जीजा की दर्दनाक मौत को याद करते हुए बताया कि दिल्ली नगर निगम में कार्यरत उनके जीजा की 2009 में नरेला में एक सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जान चली गई थी। महिला ने बताया कि बिना सुरक्षा उपकरणों के सेप्टिक टैंक में उतारना कर्मचारियों के लिए मौत के कुएं में कूदने जैसा है। वहीं 60 साल के दिहाड़ी मजदूर ने बताया कि वे बीते 25 सालों से बिना किसी सुरक्षा किट या औपचारिक ट्रेनिंग के सेप्टिक टैंक साफ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि थोड़ी ज्यादा दिहाड़ी के लालच में उन्होंने यह खतरनाक काम शुरू किया था, लेकिन आज तक उन्हें कोई आधुनिक सुरक्षा उपकरण नहीं मिला। हाल ही में एक टैंक में फिसलने से उनका पैर फ्रैक्चर हो गया था।
उन्होंने कहा कि कुछ एनजीओ दस्ताने दान करते हैं, इसलिए उनका इस्तेमाल करता हूं, लेकिन इसके अलावा, मैं बहुत कम कपड़े पहनकर टैंक के अंदर जाता हूं। पिछले 35 सालों से इस आंदोलन से जुड़ीं 64 साल की महिला ने कहा कि जब सरकार यह मानती है कि यह काम खतरनाक है और इसे करते हुए लोगों की मौत होती रहती है, तो ये सिर्फ़ मौतें नहीं हैं, बल्कि सरकार की निगरानी में हत्या हैं। अंबेडकर यूनिवर्सिटी में जाति और पेशे के मामलों के जानकार, 33 साल के एक पीएचडी स्कॉलर ने कहा कि सरकार ने भले ही सफाई अभियानों पर बहुत ध्यान दिया हो, लेकिन सबसे ज़्यादा जोखिम वाले काम करने वाले मज़दूरों के पास अब भी ज़रूरी सुरक्षा नहीं है।
इस प्रदर्शन में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया की नेता वृंदा करात और सांसद मनोज कुमार झा भी शामिल हुए। करात ने कहा कि ये सफाई कर्मचारी जीवित रहते हुए तो किसी को दिखाई नहीं देते, लेकिन मरने के बाद सरकार उनके साथ ऐसा व्यवहार करती है जैसे वे कभी थे ही नहीं। जाति और सेप्टिक टैंक से जुड़ी मौतों के बीच संबंध की ओर ध्यान दिलाते हुए झा ने कहा कि सफाई कर्मचारी बहुत जोखिम भरे काम करते हैं और उन्हें बहुत कम सुरक्षा मिलती है, साथ ही इनमें से ज़्यादातर लोग हाशिए पर रहने वाले समुदायों से आते हैं।