भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नई उड़ान

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5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य, रक्षा, एआई, ऊर्जा में बढ़ेगा सहयोग
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 5 अरब डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों की आकांक्षाएं एक जैसी हैं और वे व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में है और इस क्षेत्र के साथ भारत की भागीदारी के केंद्र में है। उन्होंने उल्लेख किया कि 2026 में भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो जाएंगे। मोदी ने कहा कि दोनों देश अब अपने संबंधों को एक व्यापक और अधिक महत्वाकांक्षी ढांचा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानताएं हैं। युवा, नवाचार, समावेशी विकास और आधुनिक प्रौद्योगिकी, यंग उज्बेकिस्तान और डेवलप्ड इंडिया 2047 दोनों के मूल सिद्धांतों में निहित हैं। इसी साझा दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, हम दोनों देशों के लोगों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इस वर्ष हमारी रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस विशेष अवसर पर, हमने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा द्विपक्षीय व्यापार 1 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। अब हमने 2030 तक 5 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया है।
रक्षा एवं सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क, सह-उत्पादन और सह-विकास के माध्यम से रक्षा और सुरक्षा सहयोग का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। भविष्य में हम दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क, सह-उत्पादन और सह-विकास को बढ़ावा देंगे। मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से लडऩे के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करते हैं। इन खतरों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति बनाए रखना हमारा साझा संकल्प रहा है और आगे भी रहेगा। प्रधानमंत्री ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग पर भी जोर दिया और कहा कि दोनों देशों की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उज़्बेकिस्तान के बागवानी के अनुभव और भारत की आधुनिक कृषि पद्धतियों को मिलाकर हम दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा में योगदान देंगे। उज़्बेकिस्तान की औषधीय जड़ी-बूटियां और भारत की आयुर्वेद विशेषज्ञता एक स्वाभाविक संयोजन है।