दर्शकों के लिए मिर्ज़ापुर में गोलू गुप्ता का किताबों से प्यार उसके व्यक्तित्व की खास पहचान बन गया था। चाहे वह किसी लाइब्रेरी में बैठी हो या किसी उपन्यास के पन्नों में सुकून तलाश रही हो, गोलू के लिए पढ़ना सिर्फ एक आदत नहीं था, बल्कि इससे दुनिया को देखने का उसका नज़रिया भी बना था। बहुत कम लोग जानते हैं कि गोलू के श्वेता की ज़िंदगी में आने से बहुत पहले ही किताबों के साथ उनका रिश्ता कुछ ऐसा ही था।श्वेता पीछे मुड़कर देखती हैं तो मानती हैं कि गोलू का पढ़ने का शौक उनके लिए किरदार की तैयारी का ऐसा हिस्सा था, जिसके लिए उन्हें ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी, क्योंकि यह उनकी अपनी जिंदगी से काफी मिलता-जुलता था। उनका मानना है कि उनकी जिज्ञासा, अपने तरीके से सोचने की आदत और लगातार कुछ नया सीखने की इच्छा, ऐसी खूबियां हैं जो वह स्वाभाविक रूप से गोलू के साथ साझा करती हैं।

