-हॉर्स ट्रेडिंग को बताया लोकतंत्र के लिए संकट
नई दिल्ली । राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने रविवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया। उन्होंने ‘हॉर्स ट्रेडिंग एंड डेमोक्रेसी’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन की शुरुआत इसी टिप्पणी से की। सिब्बल ने कहा कि उन्हें यह स्वीकार करना है कि वह ‘दिमागी नक्सल’ हैं।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की ओर से वैचारिक विरोधियों पर राजनीतिक हमले के लिए किया जाता रहा है। सिब्बल ने इसी शब्द का इस्तेमाल करते हुए सरकार और भाजपा पर तंज कसा। कार्यक्रम में सिब्बल ने विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में युद्ध जीतने के लिए घोड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी और घोड़ों के व्यापारी खरीदारों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे। उनके मुताबिक, आज राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई हैं और नेताओं की खरीद-फरोख्त लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।
जनादेश का अपमान है खरीद-फरोख्त
सिब्बल ने कहा कि विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त कोई छोटा राजनीतिक घोटाला नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के लिए बड़ा संकट है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद पैसों का लालच, पद का वादा या जांच से बचाने जैसे दबावों के जरिए बहुमत तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जनता जिस पार्टी या उम्मीदवार को वोट देती है, सत्ता की चाबी किसी दूसरे राजनीतिक पक्ष के हाथ में चली जाती है। सिब्बल ने इसे जनता के जनादेश का अपमान बताया और राजनीतिक दलों में इस तरह की खरीद-फरोख्त पर गंभीर सवाल उठाए।

