-भारत ने साफ कर दिया अपनी आबादी की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाएगा
नई दिल्ली । रूस के नाम पर भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी बिल पर सरकार ने जवाब दे दिया है। भारत ने साफ कर दिया है कि अपनी आबादी की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाएगा। साथ ही चेताया है कि इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में उस बिल को अनुमति दे दी गई, जो भारत समेत कई देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की ताकत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देता है। विदेश मंत्रालय ने लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को लेकर कहा है कि इससे जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखी जा रही है। खास बात है कि अमेरिका पहले भी भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि जैसा कि पहले भी कई बार कहा गया है, भारत अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वह अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करके और बदलते बाजार के हालात के आधार पर ऐसा करना जारी रखेगा। हाल में कई अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर चर्चा हुई है।
भारत ने यह बात बहुत साफतौर से रखी है कि इसका असर सिर्फ हमारे आपसी रिश्तों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने कारोबारी और आर्थिक हितों को बचाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सरकार भारत के कारोबारी और औद्योगिक समूहों के साथ करीबी से काम करेगी, ताकि इन घटनाक्रमों से पड़ने वाले असर को कम किया जा सके। भारत और चीन समेत कई देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का समर्थन करने वाले इस बिल ने आखिरी बाधा भी पार कर ली है। अभी इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने बाकी हैं। विधेयक के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने मतदान किया। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के सात और 152 डेमोक्रेट सांसदों ने इस विधेयक का विरोध किया। विधेयक में रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उन जहाजों के छद्म बेड़ों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जो मॉस्को को तेल की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।
डेमोक्रेट सीनेटर जीन शहीन ने कहा कि रूस शैडो फ्लीट का इस्तेमाल करके अपना तेल और गैस बेच रहा है, जिसका मतलब है कि इसे बाजार भाव से कम कीमत पर खरीदा जा रहा है और इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से चीन और भारत जैसे देशों को हो रही है। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि चीन और भारत आपको अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदना होगा। शहीन ने कहा कि चीन रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और हमें केवल पुतिन ही नहीं, बल्कि चीन और रूसी तेल और गैस खरीदने वाले हर देश को यह कड़ा संदेश देने की जरूरत है कि इसकी कीमत उन्हें चुकानी होगी। पहले भी भारत की तरफ से साफ किया जा चुका है कि रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।

