अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह में उपराष्ट्रपति की अपील
नई दिल्ली । भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के लक्ष्यों और भविष्य की चुनौतियों पर केंद्रित नौवें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) का उद्घाटन कर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने टिकाऊ जल प्रबंधन की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और बढ़ती आबादी से उत्पन्न चुनौतियों के बीच जल का विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण समय की मांग है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नदी बेसिन प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और सिंचाई के कुशल इस्तेमाल को शामिल करने वाले एकीकृत दृष्टिकोण को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया, जल सुरक्षा से जन सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उपराष्ट्रपति ने वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों के संरक्षण, भंडारण और विवेकपूर्ण इस्तेमाल का आह्वान किया।
पांच दिवसीय आयोजन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रमुख मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों सहित विभिन्न साझेदारों के सहयोग से भारत मंडपम में 22 से 26 सितंबर तक आयोजित हो रहा है। उपराष्ट्रपति ने देश की जल-भूमि विषमता पर बताया कि भारत के पास दुनिया के कुल भू-भाग का 2.4 प्रतिशत और 18 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद, मीठे जल संसाधनों का केवल करीब चार प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने स्वीकार किया कि जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि जैसे मुद्दे जल संबंधी समस्याओं को और जटिल बना रहे हैं। देश के कुछ हिस्सों में सूखा, वहीं कुछ में बाढ़ की स्थिति बनी रहती है, वहीं राज्यों के बीच जल बंटवारा भी एक बड़ी समस्या है।
हालांकि, राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराज्यीय जल सहयोग के लिए हुए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि जल बंटवारे से संबंधित 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसमें केन-बेतवा और किशाऊ जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने छह राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच जल बंटवारे पर हुए समझौते को जल शक्ति मंत्रालय की एक बड़ी उपलब्धि करार दिया। उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण जल की कमी भविष्य में बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है। उन्होंने दुनिया भर के बुद्धिजीवियों के उस कथन का भी जिक्र किया कि यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ, तो वह केवल पानी के लिए हो सकता है।
‘जलवायु अनुकूल जल प्रबंधन’ थीम पर आधारित इस आयोजन में नीति निर्माता, वैश्विक विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग जगत और युवा पेशेवर भाग ले रहे हैं। नीदरलैंड और जर्मनी साझेदार देश हैं, जबकि 14 प्रदेश साझेदार राज्यों के रूप में हिस्सा ले रहे हैं। इसी के साथ, दूसरा अंतरराष्ट्रीय ‘वॉश’ सम्मेलन भी 22 से 24 सितंबर तक आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू के साथ आयोजित किया जा रहा है।

