मुंबई, । फरार आर्थिक अपराधी विजय माल्या से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दाखिल किए जा रहे दस्तावेजों को अदालत के विचार से पहले सार्वजनिक किए जाने पर आपत्ति जताई है। अदालत ने माल्या के वकीलों को यह संदेश उन तक पहुंचाने का निर्देश दिया कि ऐसी गतिविधियां तत्काल रोकी जानी चाहिए, अन्यथा अदालत उचित आदेश जारी कर सकती है। माल्या की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई अदालत में पेश हुए। मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से यह मुद्दा उठाया गया कि अदालत के समक्ष रखे जाने वाले दस्तावेजों को माल्या विदेश से सोशल मीडिया पर पहले ही सार्वजनिक कर देते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने इस आचरण को गंभीरता से लेते हुए उनके वकीलों के माध्यम से उन्हें ऐसा नहीं करने की हिदायत देने को कहा।
- भारत वापसी पर माल्या का तर्क
माल्या इस समय ब्रिटेन में हैं। उनके वकील अमित देसाई ने अदालत को बताया कि ब्रिटेन में उनके खिलाफ कुछ कानूनी मामले लंबित हैं और वहां की अदालत के आदेश के कारण फिलहाल उनके लिए ब्रिटेन से बाहर जाना संभव नहीं है। इसी वजह से वह भारत लौटने की निश्चित तारीख बताने की स्थिति में नहीं हैं। माल्या की भारत वापसी से जुड़ी प्रत्यर्पण प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि माल्या को भारत लौटकर अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। सरकार का कहना है कि यदि वह भारत आते हैं तो उनके दावों और बैंकों से जुड़े मामलों पर कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई की जा सकती है। - जब्त संपत्तियों से बैंकों को बड़ी रकम मिली
माल्या की संपत्तियों से बैंकों की देनदारियों की वसूली का मुद्दा भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने SBI और ईडी से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या माल्या की ईडी द्वारा जब्त की गई चल संपत्तियों से प्राप्त रकम के जरिए उनकी देनदारियां पूरी तरह चुकाई जा चुकी हैं। सितंबर में ईडी ने अदालत को बताया कि माल्या से संबंधित करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां बैंकों को दी गई हैं, लेकिन संपत्तियों की वसूली होने से उनके खिलाफ लंबित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप समाप्त नहीं होते। - फरार आर्थिक अपराधी घोषित करने के कानून को चुनौती
माल्या ने फरार आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत उन्हें घोषित किए गए फरार आर्थिक अपराधी के दर्जे और संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया को भी चुनौती दी है। उनकी ओर से दलील दी गई है कि कानून के कुछ प्रावधान उनके अधिकारों को प्रभावित करते हैं और यदि बाद में आरोप साबित नहीं होते हैं तो जब्त संपत्तियों की वापसी से संबंधित प्रावधानों को लेकर भी सवाल हैं। इसके जवाब में ईडी का कहना है कि कानून के तहत संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में होती है और विशेष अदालत के पास संबंधित मामलों में आवश्यक आदेश देने की शक्ति है। - बैंकों से करीब 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज का मामला
विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े करीब 9,000 करोड़ रुपये के बैंक कर्ज का मामला वर्षों से कानूनी विवाद का विषय रहा है। माल्या के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग सहित विभिन्न मामलों में कार्रवाई हुई और ईडी ने उनकी संपत्तियां जब्त कीं। हालिया सुनवाई में भी संपत्तियों से हुई वसूली और लंबित कानूनी कार्रवाई के बीच संबंध पर अदालत का ध्यान केंद्रित रहा है। माल्या की ओर से यह भी कहा गया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों की देनदारियों का बड़ा हिस्सा वसूला जा चुका है और वह अपनी संपत्तियों के जरिए बकाया रकम चुकाने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, जांच एजेंसी का कहना है कि वित्तीय वसूली और आपराधिक आरोप अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं। इस पूरे मामले में अब अदालत के समक्ष माल्या की याचिकाओं, भारत वापसी से जुड़े कानूनी घटनाक्रम, जब्त संपत्तियों से हुई वसूली और सोशल मीडिया पर दस्तावेज सार्वजनिक करने के मुद्दे पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

