टाटा ग्रुप की ट्रस्ट-आधारित विरासत को बचाना जरुरी : शरद पवार

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मुंबई । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने टाटा ग्रुप की अनूठी ट्रस्ट-आधारित विरासत और उसके धर्मार्थ स्वामित्व संरचना को बचाने की वकालत की है। उन्होंने जोर दिया कि ग्रुप की संस्थागत भूमिका को बरकरार रखा जाना चाहिए। राज्यसभा सांसद पवार ने कहा कि नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद को बातचीत, उचित प्रक्रिया और टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का कड़ाई से पालन कर सुलझाया जाना चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने टाटा ग्रुप को महाराष्ट्र में गहरी जड़ें रखने वाला एक राष्ट्रीय संस्थान बताया, जिसकी विरासत इस सिद्धांत पर बनी है कि व्यापार से अर्जित धन का अंततः समाज के कल्याण के लिए उपयोग होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाटा ट्रस्ट्स की संस्थागत भूमिका और गवर्नेंस के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। ये ट्रस्ट समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।
राज्यसभा सांसद पवार के ये बयान टाटा संस बोर्ड की हाल ही में हुई बैठक के बाद आए हैं, जिसमें एन. चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने के लिए मतदान हुआ था। इस प्रस्ताव का चार डायरेक्टर्स ने समर्थन किया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया, जिसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने इस वोट को अमान्य घोषित किया। पवार ने रेखांकित किया कि शेयरहोल्डर्स द्वारा अपनाए गए नियमों के तहत, ट्रस्ट द्वारा नॉमिनेट किए गए डायरेक्टर्स को चेयरमैन की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर अफ़र्मेटिव वोटिंग राइट्स (सहमति देने का अधिकार) प्राप्त हैं। उन्होंने जोर दिया कि नेतृत्व से जुड़े फैसले बहुमत वाले शेयरहोल्डर, यानी टाटा ट्रस्ट्स की सहमति से होने चाहिए, न कि उन्हें लंबे समय तक चलने वाले विवादों में बदलने दिया जाए।