मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी छह अंतरे के गायन को अनिवार्य करने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। यह याचिका प्रख्यात गायक टी. एम. कृष्णा ने दाखिल की है। सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने टिप्पणी की कि कानून बनाना नक्सलियों के हिसाब से नहीं होना चाहिए। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने कड़ी आपत्ति जाहिर की और टिप्पणी वापस लेने की मांग की, उन्होंने इस गैर-जरूरी और मर्यादाहीन बताया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारियों से ऐसी उम्मीद नहीं हो सकती। दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें सॉलिसिटर जनरल ने अपनी टिप्पणी पर कोई अफसोस न जताकर कहा कि उन्हें कानून के हिसाब से चलना होता है। वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा कि सोचने का मतलब नक्सली होना नहीं है।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने दखल देकर संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और संविधान के तहत एक आरोपी व्यक्ति के भी समान अधिकारों पर जोर दिया। याचिकाकर्ता कृष्णा ने अपनी याचिका में कहा है कि राष्ट्रगीत में जोड़े गए चार स्टैंजा धार्मिक प्रकृति के हैं, और इसके अपमान पर दंड का प्रावधान भी चुनौती का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत क्या हो, यह तय करना अदालत का काम नहीं है, लेकिन दंड के प्रावधान पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल को सौंपकर अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

