बेल्जियम से आया 308 पहियों वाला ट्रक 4 राज्यों से गुजरेगा

ताज़ा खबर देश-विदेश

नई दिल्ली । इन दिनों 308 पहियों वाला एक विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बेल्जियम से समुद्री रास्ते से लाई गई करीब 200 टन वजनी एक औद्योगिक मशीन को यह विशेष ट्रेलर उत्तर प्रदेश ले जा रहा है। ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर उतारी गई इस मशीन को 308 पहियों वाले हाइड्रोलिक मॉड्यूलर ट्रेलर पर लोड किया गया, जिसका अंतिम गंतव्य उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल की इकाई है। यह ट्रक ओडिशा, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेगा।
इतने बड़े आकार और अत्यधिक वजन के कारण इस ट्रक का सफर सामान्य वाहनों जैसा नहीं है। इसकी औसत रफ्तार महज 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे है, और यह 24 घंटे में लगभग 10 से 12 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाता है। अत्यधिक भार और सुरक्षा कारणों से इसे तेज गति से चलाना जोखिम भरा होता है। सड़क की भार क्षमता, तीव्र मोड़ लेने की क्षमता, वाहन की विशाल लंबाई-चौड़ाई और ऊपर से गुजरने वाले तारों की ऊंचाई जैसे कई तकनीकी पहलू इसकी धीमी गति के लिए जिम्मेदार हैं। रास्ते में आने वाली भौतिक और तकनीकी बाधाओं को हटाना पड़ रहा है। वाराणसी के मोहनसराय के पास कम ऊंचाई वाले फुट ओवरब्रिज के कारण ट्रक को कई दिनों तक रोका गया। वहीं बिहार के औरंगाबाद जिले के बारुण में रेलवे ओवरब्रिज के नीचे से निकालने के लिए बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ी और कुछ समय के लिए रेल यातायात भी रोकना पड़ा। जहां भी कम ऊंचाई वाले पुल या हाईटेंशन तार सामने आते हैं, वहां प्रशासन और तकनीकी टीम रास्ता सुरक्षित बनाती है, जिसमें कई बार पुलों को हटाने या दोबारा बनाने और तारों को स्थानांतरित करने का भुगतान भी शामिल है। यह बाहुबली ट्रक ओडिशा, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश से होकर अपनी मंजिल तक पहुंचेगा। इसके मार्ग में ओडिशा के पारादीप, दुबुरी, पितरी, पल्लाहारा और राउरकेला के बाद झारखंड के गुमला, रांची और बरही शामिल हैं। इसके बाद बिहार में औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर से गुजरते हुए यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच और लखीमपुर तक पहुंचेगा। इस पूरे परिवहन अभियान पर करीब 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें रूट मैपिंग, सर्वे, विभिन्न विभागों की अनुमतियां, 40-50 सदस्यों वाली क्रू और इंजीनियरिंग टीम का खर्च, तथा रास्ते की बाधाओं (पुल, तार) को हटाने या पुनर्निर्मित करने की लागत शामिल है। यह खर्च संबंधित कंपनी द्वारा वहन किया जा रहा है। ट्रक पर लदा औद्योगिक वैक्यूम पैन वेसल, जिसे सरकारी दस्तावेजों में ‘साइक्लाइजेशन रिएक्टर’ बताया गया है, लोहे और विशेष मिश्रधातु से बना करीब 200 मीट्रिक टन वजनी बेलनाकार ढांचा है। इसे बलरामपुर चीनी मिल की कुंभी इकाई में इथेनॉल और चीनी उत्पादन संयंत्र को आधुनिक बनाने के लिए स्थापित किया जाएगा। 308 पहियों वाला यह वाहन मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक मॉड्यूलर सिस्टम है। इसके पहिए वजन को समान रूप से बांटते हैं, जिससे सड़क पर दबाव कम होता है। इसमें स्वतंत्र सस्पेंशन, रिमोट नियंत्रित स्टीयरिंग और आगे-पीछे भारी वोल्वो पुलर इंजन लगाए गए हैं, जो इतने विशाल भार को खींचने और नियंत्रित करने में मदद करते हैं। यह असाधारण सफर अभी जारी है।