नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग ने एक राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के लिए इस सम्मान की सिफारिश करने का अनुरोध किया है। इस मांग पर बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है और अपने नाम से ऐसी किसी भी सिफारिश से इनकार किया है। एनसीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी को 30 सितंबर को लिखे पत्र में 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने का हवाला देते हुए यह मांग रखी है। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग के नेतृत्व में हुई चुनाव प्रक्रिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत किया है। एनसीपीआई ने प्रधानमंत्री से ज्ञानेश कुमार के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास भारत रत्न के लिए करने का आग्रह किया है।
सांसद यूसुफ पठान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले पर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बंगाल, मुर्शिदाबाद, बहरामपुर और देश के लोग अपने वोट के अधिकार को लेकर आवाज उठा रहे हैं, ऐसे समय में वह किसी अवॉर्ड की सिफारिश क्यों करेंगे। पठान ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने इस तरह का कोई पत्र नहीं लिखा है और उनके नाम से इस तरह की किसी सिफारिश किए जाने से इनकार किया। उन्होंने मांग की कि यदि उनके नाम से कोई पत्र या सिफारिश सामने आ रही है, तो उसकी कॉपी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पठान ने जोर देकर कहा कि उनके नाम से कहानियां बनाने वालों को सबूत सामने रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई पत्र नहीं है और उसकी कॉपी सार्वजनिक नहीं की जाती है, तो इसे फर्जी और उनके नाम के गलत इस्तेमाल के तौर पर देखा जाएगा।

