तकनीक और विरासत का अद्भुत संगम
- स्टैक्ड अंडरग्राउंड स्टेशन से लेकर 750 वोल्ट थर्ड रेल तक—सूरत मेट्रो बदल रही है शहर के सफर की तस्वीर
- 700 साल पुराने ‘चोर आमली’ पेड़ को बचाने के लिए बदला गया मेट्रो अलाइनमेंट
सूरत । टेक्सटाइल और हीरा उद्योग के लिए दुनियाभर में पहचान रखने वाला सूरत अब आधुनिक शहरी परिवहन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। ब्रिज सिटी और सिल्क सिटी के नाम से मशहूर यह शहर अब मेट्रो रेल परियोजना के जरिए तेज, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। सूरत मेट्रो परियोजना में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग, तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में विकसित हो रहे आधुनिक बुनियादी ढांचे में सूरत मेट्रो परियोजना को महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। खास बात यह है कि मेट्रो के डिजाइन में भी सूरत की पहचान को प्रमुखता दी गई है।
मेट्रो के डिजाइन में दिखेगा ‘डायमंड सिटी’ का अंदाज
सूरत की विश्व प्रसिद्ध डायमंड सिटी की पहचान को मेट्रो के इंटीरियर में भी जगह दी गई है। मेट्रो ट्रेन की सीलिंग और एलिवेशन में हीरे के अलग-अलग कट्स से प्रेरित डिजाइन तैयार किए गए हैं। मेट्रो में प्रवेश करते ही यात्रियों को सूरत की डायमंड सिटी वाली पहचान का अनुभव हो, इस तरह इंटीरियर को तैयार किया जा रहा है।
भीड़भाड़ वाले इलाकों में बनेगा अनोखा ‘स्टैक्ड स्टेशन’
सूरत मेट्रो की सबसे खास विशेषताओं में स्टैक्ड अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। पुराने शहर के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों भागल और कपोद्रा में ऐसे दो भूमिगत स्टैक्ड स्टेशन तैयार किए गए हैं।
सामान्य मेट्रो स्टेशन में दोनों दिशाओं की ट्रेन के ट्रैक एक-दूसरे के समानांतर और एक ही स्तर पर होते हैं। लेकिन स्टैक्ड स्टेशन में दोनों ट्रैक ऊपर-नीचे बनाए जाते हैं। यानी एक दिशा की ट्रेन ऊपर के स्तर से और दूसरी दिशा की ट्रेन उसके ठीक नीचे बने स्तर से गुजरती है।
इस तकनीक से सीमित जमीन में भी मेट्रो का निर्माण संभव होता है और आसपास की संपत्तियों या ऐतिहासिक इमारतों के बड़े पैमाने पर अधिग्रहण की जरूरत कम होती है।
ऐसे स्टेशनों के निर्माण में टनल बोरिंग मशीन (TBM) के जरिए एक-दूसरे के ऊपर-नीचे वर्टिकल स्टैक्ड टनल तैयार की जाती हैं। जमीन की मजबूती बनाए रखने के लिए डायफ्राम वॉल और टॉप-डाउन कंस्ट्रक्शन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
700 साल पुराने पेड़ के लिए बदला मेट्रो का अलाइनमेंट
सूरत मेट्रो परियोजना में विकास के साथ पर्यावरण और विरासत संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। अडाजण गांव क्षेत्र में मेट्रो रूट के रास्ते में आ रहे 700 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक ‘चोर आमली’ वृक्ष को बचाने के लिए मेट्रो का अलाइनमेंट तक बदल दिया गया।
यह फैसला बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में प्रकृति और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का उदाहरण बनकर सामने आया है। इसे ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
ड्रीम सिटी डिपो में एक साथ 24 ट्रेनें होंगी खड़ी
खजोड़ में करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रीम सिटी डिपो विकसित किया गया है। यहां एक साथ 24 मेट्रो ट्रेनों को खड़ा करने की क्षमता वाला स्टेबलिंग यार्ड बनाया गया है।
डिपो में ट्रेन के रखरखाव और धुलाई के लिए वॉशिंग प्लांट, तकनीकी यूनिट और प्रशासनिक ब्लॉक जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं। परिसर में 3,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं। पानी के पुनः उपयोग के लिए सीवेज और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था भी की गई है।
बिजली के खंभों के बिना दौड़ेगी मेट्रो
सूरत मेट्रो में आधुनिक 750 वोल्ट DC थर्ड रेल सिस्टम के जरिए बिजली की आपूर्ति की जाएगी। इस व्यवस्था में पारंपरिक ओवरहेड बिजली के तार और खंभों की आवश्यकता नहीं होगी।
इससे शहरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी और तेज हवाओं तथा तूफान जैसी परिस्थितियों में भी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित रखने में सहायता मिलेगी।
मजूरागेट बनेगा शहर का पहला इंटरचेंज हब
सूरत मेट्रो के दोनों कॉरिडोर को जोड़ने वाला मजूरागेट स्टेशन शहर का पहला प्रमुख इंटरचेंज हब बनेगा। यहां यात्री एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर में आसानी से जा सकेंगे।
इसके साथ रेलवे स्टेशन, सिटी बस और GSRTC डिपो को जोड़कर मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे शहर में अलग-अलग माध्यमों से यात्रा करने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
810 टन स्टील से तैयार हुआ 85 मीटर लंबा ओपन वेब गर्डर
सारोली और रघुकुल टेक्सटाइल मार्केट क्षेत्र में मेट्रो के लिए 85 मीटर लंबा ओपन वेब गर्डर लॉन्च किया गया है। इसके निर्माण में करीब 810 टन स्टील और 47 हजार से अधिक नट-बोल्ट का इस्तेमाल हुआ है।
घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में इतनी बड़ी स्टील संरचना का निर्माण और लॉन्चिंग सूरत मेट्रो परियोजना की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है।
बग्गी-टांगा से मेट्रो तक पहुंचा सूरत का सफर
सूरत के परिवहन का इतिहास जलमार्गों, बग्गी और टांगा से शुरू होकर BRTS और आधुनिक पुलों तक पहुंचा है। अब मेट्रो रेल इस यात्रा को एक नई दिशा देने जा रही है।
टेक्सटाइल, डायमंड, BRTS और ब्रिज सिटी के रूप में अपनी पहचान बना चुका सूरत अब मेट्रो सिटी के रूप में भी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। स्टैक्ड अंडरग्राउंड स्टेशन, थर्ड रेल तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, विरासत का सम्मान और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी ये सभी विशेषताएं सूरत मेट्रो को केवल परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य के आधुनिक और टिकाऊ सूरत की तस्वीर बनाती हैं।

