केंद्र सरकार की नीतियों से कुछ चुनिंदा उद्योगपति समूहों को फायदा : मल्लिकार्जुन खड़गे

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नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर आर्थिक नीतियों के जरिए एकाधिकार और दो कंपनियों के दबदबे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों से कुछ चुनिंदा उद्योगपति समूहों को फायदा मिल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पोस्ट कर भाजपा पर आर्थिक उदारीकरण की भावना को कमजोर करने और अपने हितों के लिए आर्थिक आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले इस क्षेत्र में 13 कंपनियां थीं, जबकि अब तीन बड़ी निजी कंपनियों का दबदबा रह गया है। उन्होंने घरेलू विमानन क्षेत्र का जिक्र कर कहा कि पहले सात बड़ी कंपनियां थीं, लेकिन अब प्रमुख बाजार में दो कंपनियों का प्रभाव है। उनके मुताबिक, डिजिटल भुगतान, सीमेंट और भोजन पहुंचाने वाले मोबाइल मंचों सहित कई क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा कम होने की स्थिति दिखाई देती है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इन नीतियों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को नुकसान हुआ है तथा युवाओं के सामने बेरोजगारी की समस्या बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की आर्थिक नीतियां आम कारोबारियों और छोटे उद्योगों के बजाय कुछ बड़े कारोबारी समूहों के हितों को प्राथमिकता देती हैं। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा से जुड़े आंकड़ों का स्वतंत्र आकलन जरूरी है।
इस बीच, कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने अमेरिकी सरकार के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम को निलंबित करने के फैसले पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इसका असर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर पड़ सकता है और यह भारत की नीतियों पर अमेरिकी प्रभाव से जुड़े सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस सांसद माथेर ने डिजिटल भुगतान प्रणाली का उल्लेख कर कहा कि भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस और रुपे के विस्तार के बीच अमेरिकी कंपनियों के हितों से जुड़े मुद्दे सामने आए थे। खड़गे ने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में चुनिंदा कंपनियों को रियायतें मिल रही हैं। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में रिलायंस और बिजली क्षेत्र में अडाणी समूह का उल्लेख कर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से उद्योगों में प्रतिस्पर्धा, सरकारी रियायतों और छोटे कारोबारियों की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।