अब तक आजम खान के 16 मुकदमों में फैसला आ चुका, आठ में हुई है सजा
रामपुर । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और तेजतर्रार नेता आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी निर्माण में काला धन लगा होने के आरोपों की जांच कर रही ईडी के लगातार रामपुर आने से खलबली मच गई थी। ईडी चार साल में यहां तीसरी बार आई है, जबकि दो माह में ईडी का दूसरी बार आना हुआ। इससे यूनिवर्सिटी निर्माण से जुड़े फर्म संचालकों की बेचैनी बढ़ गई है। ईडी इनके खिलाफ कभी भी कार्रवाई शुरू कर सकती है।
इस साल 19 अगस्त को ईडी रामपुर आई थी। तब ईडी के अधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने एक साथ आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी समेत आधा दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की थी और कई लोगों से पूछताछ की थी। दरअसल, आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी में सरकारी धन के दुरुपयोग व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही ईडी की रडार पर कई फर्म हैं, जिन्होंने यूनिवर्सिटी के निर्माण में ठेकेदारी की है। ईडी का अनुमान है कि सरकारी ठेकों के जरिए आने वाले फंड को निजी ठेकेदारों की मदद से डायवर्ट कर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के निर्माण में उसका इस्तेमाल किया गया। आयकर की जांच में भी करीब सौ करोड़ रुपए सरकारी बजट यूनिवर्सिटी के निर्माण पर खपाने की बात सामने आ चुकी है।
अब्दुल्ला के दो पैन कार्ड मामले में आजम खान की ओर से हाईकोर्ट में की गई अपील पर बुधवार को सुनवाई होगी। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल से अब्दुल्ला व उनके पिता आजम खान को सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी। अभियोजन पक्ष ने सजा बढ़ाने को लेकर एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में अपील की थी। इस पर सुनवाई के बाद आजम खान की सजा बढ़ाकर दस साल कर दी गई जबकि, अब्दुल्ला की सजा सात साल बरकरार रखी। इस सजा के खिलाफ ही आजम खान की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
अब तक मोहम्मद आजम खान के 16 मुकदमों में न्यायालय ने फैसला सुना दिया है। जिनमें आठ में सजा हुई है जबकि, अन्य आठ में क्लीन चिट मिली है। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर आजम खान के खिलाफ 84 मुकदमे दर्ज हुए थे। मुकदमा दर्ज कराने वाले 90 प्रतिशित पीड़ित मुस्लिम ही हैं। आजम को सबसे अधिक दस-दस वर्षों की सजा डूंगरपुर व दो पैन कार्ड बनवाने और उनका उपयोग करने के मामले में हुई है। हाल ही में रामपुर विकास प्राधिकरण के जौहर विश्वविद्यालय में बिना नक्शा स्वीकृत कराए बनाये गए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश को लेकर आजम खान फिर सुर्खियों में रहे। हालांकि, मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण के आदेश पर अंतरिम रोक लगाकर उन्हें थोड़ी राहत दे दी है।

