रोजाना आ रही 8 से 10 हजार शिकायतें, 1600 करोड़ रुपये फ्रीज
मुंबई । महाराष्ट्र में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी के जरिए लोगों को लाखों ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। साइबर अपराधी डर, जल्दबाजी, पैसों के लालच, भरोसे, प्रेम और गोपनीयता का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। महाराष्ट्र साइबर विभाग के मुताबिक, राज्य में हर दिन साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी करीब 8,000 से 10,000 शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों ने ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2024 से महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में करीब 1,600 करोड़ रुपये फ्रीज करने में सफलता हासिल की है। हालांकि, इसी अवधि में साइबर ठगी से होने वाला कुल आर्थिक नुकसान लगभग 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि फ्रीज की गई रकम कुल अनुमानित नुकसान का करीब 23 से 27 प्रतिशत है। यानी ठगी के जरिए गंवाई गई बड़ी रकम का एक हिस्सा ही अब तक रोकने में सफलता मिली है। दूसरी ओर, दावा किया गया है कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष ऑनलाइन धोखाधड़ी से होने वाला आर्थिक नुकसान 10 से 15 प्रतिशत तक कम हुआ है। इसे कोविड महामारी के बाद पहली बार साइबर ठगी से होने वाले आर्थिक नुकसान में आई गिरावट के रूप में भी देखा जा रहा है।
- निवेश के नाम पर ठगी और सेक्सटॉर्शन के मामले बढ़े
महाराष्ट्र में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी और सेक्सटॉर्शन प्रमुख साइबर अपराधों में शामिल हैं। साइबर अपराधी लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश करने के लिए उकसाते हैं। वहीं, सेक्सटॉर्शन के मामलों में निजी तस्वीरों या वीडियो का डर दिखाकर लोगों से पैसे वसूले जाते हैं। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के साथ 58 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया था। जानकारी के मुताबिक, इस मामले में पूरी रकम बरामद करने में सफलता मिली। इसके अलावा, महाराष्ट्र साइबर विभाग ने बताया कि ऑनलाइन उत्पीड़न, सेक्सटॉर्शन और साइबर बुलिंग के जाल में फंसे 237 बच्चों और किशोर-किशोरियों को बचाया गया। - गैस बिल के नाम पर 2,000 से ज्यादा लोगों से ठगी
साइबर अपराधियों ने गैस बिल के नाम पर भी लोगों को निशाना बनाया। इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में दावा किया गया है कि इस गिरोह ने 2,000 से अधिक लोगों को ठगकर करीब 43 करोड़ 25 लाख रुपये जमा किए। इस तरह के मामलों में अपराधी अक्सर बिल बकाया होने, कनेक्शन कटने या भुगतान अपडेट करने का डर दिखाकर लोगों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए कहते हैं। इसके बाद बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर खाते से पैसे निकालने की कोशिश की जाती है। - साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, बिना जांच-पड़ताल के निवेश योजनाओं पर भरोसा करने या बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी और पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करने से बचें। यह भी ध्यान रखें कि कोई भी वास्तविक पुलिस अधिकारी फोन या वीडियो कॉल पर डर दिखाकर आपको तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में नहीं रख सकता। ऐसी धमकियों से घबराने के बजाय संबंधित एजेंसियों से आधिकारिक माध्यमों के जरिए संपर्क करें। अगर आपके साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जल्द शिकायत करने से ठगी की रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है। बहरहाल महाराष्ट्र में सामने आ रहे ये मामले बताते हैं कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत करना आर्थिक नुकसान से बचने के लिए बेहद जरूरी है।

