:: जिनवाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची आराधना; साधुमार्गी जैन समता संघ के तीन केंद्रों पर संतों के प्रवचन जारी ::
इंदौर । अटल मुनि महाराज ने कहा कि वर्षों से प्रवचन सुनने, धार्मिक आयोजनों और चातुर्मास में शामिल होने के बावजूद यदि हमारे आचरण में सकारात्मक बदलाव नहीं आ रहा है तो इस पर आत्मचिंतन करना चाहिए। धर्मसभा में बैठना और प्रवचन सुनना पर्याप्त नहीं है। जिनवाणी के संदेशों को व्यवहार में उतारना ही सच्ची आराधना है।
वे साधुमार्गी जैन समता संघ के तत्वावधान में गुमाश्ता नगर स्थित मुकुट मांगलिक भवन में चल रहे चातुर्मासिक आयोजन की धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की वाणी का अनुसरण कर अनेक आत्माएं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर चुकी हैं। जिन शासन में कर्म प्रधान है और आठ कर्मों के सिद्धांत का विशेष महत्व है। आज बच्चों में संस्कार और जीवन मूल्यों की स्थापना की भी सख्त जरूरत है।
:: नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना जरूरी ::
आदित्य मुनि महाराज ने कहा कि बच्चों को अभक्ष और अपेय से दूर रहने, परिवार की मर्यादा के अनुरूप आचरण करने और कुसंगति से बचने की सीख देना जरूरी है। उनमें माता-पिता की आज्ञा का पालन करने, बुजुर्गों और गुरुजनों का सम्मान करने, परमात्मा की भक्ति तथा परमार्थ की भावना विकसित करनी चाहिए। बच्चों को तामसी प्रवृत्तियों से दूर रखकर अच्छे संस्कार देना परिवार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
:: तीन स्थानों पर हो रहे प्रवचन ::
संघ अध्यक्ष पारस बोहरा एवं मीडिया प्रभारी मनीष बोहरा ने बताया कि गुमाश्ता नगर स्थित मुकुट मांगलिक भवन में आदित्य मुनि, अटल मुनि, रामदर्श मुनि और रामहर्ष मुनि प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक प्रवचन दे रहे हैं। विंध्याचल नगर स्थित स्थानक भवन में शासन दीपक पद्ममुनि और निर्वाण मुनि तथा यशवंत निवास रोड स्थित समता भवन में शासन दीपिका श्रीकांताजी म.सा. एवं आदिठाणा-16 के सान्निध्य में भक्ताम्बर स्तोत्र और उत्तराध्ययन सूत्र पर प्रवचन हो रहे हैं। तीनों स्थानों पर बड़ी संख्या में समाजजन धर्मसभा में शामिल होकर धर्मलाभ ले रहे हैं।

