-इसका इस्तेमाल दूरसंचार, डिजिटल सेवाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी होता है
नई दिल्ली । भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्वदेशी एटॉमिक घड़ी को अंतरिक्ष में भेजकर देश की क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में नई उपलब्धि हासिल की है। यह तकनीक भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली नाविक को ज्यादा सटीक और भरोसेमंद बनाने में मदद करेगी। एटॉमिक घड़ी का इस्तेमाल केवल अंतरिक्ष में ही नहीं, बल्कि दूरसंचार, डिजिटल सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी होता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एटॉमिक घड़ी समय मापने वाला बेहद सटीक उपकरण है। सामान्य घड़ियां यांत्रिक पुर्जों या क्वार्ट्ज क्रिस्टल की मदद से समय मापती हैं, जबकि एटॉमिक घड़ी परमाणुओं की प्राकृतिक कंपन आवृत्ति पर आधारित होती है। इसमें रुबिडियम या सीजियम जैसे परमाणुओं के ऊर्जा स्तरों में होने वाले बदलावों का इस्तेमाल किया जाता है। परमाणुओं की कंपन आवृत्ति अत्यंत स्थिर होती है, जिससे यह घड़ी लंबे समय तक सटीक समय बनाए रखती है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल उपग्रह नेविगेशन और वैज्ञानिक प्रणालियों में किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक इसरो ने जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के माध्यम से एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया है। इसमें स्वदेशी रुबिडियम एटॉमिक घड़ी लगाई गई है, जिसे अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र ने विकसित किया है। यह इसरो द्वारा विकसित इस तरह की तीसरी घड़ी है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की नाविक नेविगेशन प्रणाली को मजबूत करना और उसकी सटीकता बढ़ाना है। स्वदेशी तकनीक के विकास से भारत को विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
नाविक भारत की स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य भारत और आसपास के क्षेत्रों में सटीक स्थिति, नेविगेशन और समय संबंधी सेवाएं प्रदान करना है। स्वदेशी रुबिडियम घड़ी से इसकी विश्वसनीयता और सटीकता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसका फायदा रक्षा क्षेत्र, समुद्री गतिविधियों, सीमावर्ती इलाकों और नागरिक नेविगेशन सेवाओं को मिल सकता है। एटॉमिक घड़ी का महत्व डिजिटल भारत और ‘एक राष्ट्र, एक समय’ जैसी पहलों के लिए भी है। बैंकिंग, मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल संचार और कंप्यूटर प्रणालियों में समय का सटीक तालमेल बेहद जरूरी होता है। स्वदेशी समय तकनीक इन क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और विश्वसनीयता सुनिश्चित कर सकती है।

