नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (एमईए) को निर्देश दिया कि वह राजनयिक चैनलों का उपयोग करके उस भारतीय नाविक का पता लगाए, जो यूक्रेन के पास काला सागर में कार्गो जहाज पर ड्रोन हमले के बाद लापता हुआ। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ साधारण नाविक दीपक कुमार गुप्ता से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो एमवी एजीएन रैगनार पर कार्यरत थे।
सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि लापता नाविकों की स्थिति को लेकर परस्पर विरोधी खबरें आई थीं, कुछ रिपोर्टों में चारों नाविकों के डूबने का दावा किया गया, जबकि अन्य में दो के जीवित होने की बात सामने आई थी। सीजेआई सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें मोदी सरकार के तत्काल और गंभीर दखल की ज़रूरत है। दीपक कुमार गुप्ता उन चार भारतीय नाविकों में से एक थे जिनके जहाज पर 25 जुलाई को यूक्रेन के पास ड्रोन से हमला हुआ था।
जहाज पर कुल नौ क्रू मेंबर थे, जिसमें चार भारतीय थे। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने बाद में बताया था कि चार भारतीय नागरिकों में से दो सुरक्षित हैं, जबकि बाकी दो के बारे में जानकारी का इंतजार था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि चार भारतीय क्रू मेंबर में से दो को रोमानियाई कोस्ट गार्ड की मदद से बचाया गया, जबकि बाकी दो को आग से बचने के लिए पानी में कूदना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे यूक्रेन और रोमानिया में भारतीय दूतावासों से गुप्ता के ठिकाने के बारे में तुरंत निर्देश लें। सुप्रीम कोर्ट ने एमईए को लापता व्यक्ति को खोजने के लिए अपने राजनयिक चैनलों का भी उपयोग करने का निर्देश दिया। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वे अगली सुनवाई तक इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते है।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने ऐसी खबरों का ज़िक्र किया कि रोमानियाई अधिकारियों ने दो लोगों को बचाया है, लेकिन बाद में यह खबर हटा दी गई थी। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों का हवाला देकर मानव तस्करी की आशंका जाहिर की। जस्टिस बागची ने बीमा कंपनी क पत्र का उल्लेख किया जिसमें दो नाविकों को रोमानियाई अधिकारियों की हिरासत में बचाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन किसी भी पोर्ट स्टेट द्वारा इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। उन्होंने सरकार से भारतीय नाविकों से संबंधित दुर्घटना प्रोटोकॉल के पालन की भी जानकारी मांगी।

