सेवा और कैडर आवंटन में आया कानूनी पेंच, सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के बाद प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद
नई दिल्ली । संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में चयनित 958 उम्मीदवारों की सेवा और कैडर आवंटन प्रक्रिया ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े कानूनी विवाद के कारण प्रभावित हुई है। इसके चलते मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में होने वाला फाउंडेशन कोर्स भी समय पर शुरू नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि स्वतंत्रता के बाद यह पहला मौका है, जब पूरे बैच की प्रशिक्षण प्रक्रिया इस तरह कानूनी और नीतिगत पेच में फंसी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विवाद की मुख्य वजह ओबीसी क्रीमी लेयर के निर्धारण से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। रोहित नाथन बनाम केंद्र सरकार मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयूएस) या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता के वेतन अथवा आय को अकेले आधार बनाकर उनके बच्चों को क्रीमी लेयर में शामिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता के पद, उसकी स्थिति और सरकारी पदों के साथ उसकी समकक्षता जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इस फैसले के संभावित पूर्वव्यापी प्रभाव को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण याचिका दायर की थी। सरकार की चिंता थी कि यदि बदली हुई व्यवस्था को पिछली भर्ती प्रक्रियाओं पर लागू किया गया तो इससे सेवा आवंटन, कैडर निर्धारण और अधिकारियों की वरिष्ठता पर व्यापक असर पड़ सकता है।
कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण 958 चयनित उम्मीदवारों को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस समेत विभिन्न सेवाओं और कैडरों का आवंटन रोकना पड़ा। सेवा आवंटन के बिना फाउंडेशन कोर्स की प्रक्रिया आगे बढ़ाना भी संभव नहीं था।
अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद सेवा और कैडर आवंटन की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही चयनित अधिकारियों के फाउंडेशन कोर्स और प्रशिक्षण शुरू होने का रास्ता भी साफ होने लगा है।

