तंदूरी चिकन के तीखे स्वाद से भारतीय साड़ी के मोह तक, अरहर की दाल बनी पंसद

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सोनिया गांधी की इटली से भारत तक की कहानी
नई दिल्ली । कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी की आगामी पुस्तक बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव इन दिनों चर्चा में है। 10 नवंबर को रिलीज होने वाली किताब में सोनिया गांधी ने अपने निजी जीवन, प्रेम, पारिवारिक रिश्तों और इटली से भारत तक के सफर से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए हैं। पुस्तक में उन्होंने बताया है कि कैसे भारतीय खानपान, पारिवारिक परंपराओं और साड़ी ने धीरे-धीरे उनके जीवन में खास जगह बना ली।
सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में राजीव गांधी से पहली मुलाकात से लेकर भारत में बहू के रूप में शुरुआती दिनों तक के अनुभवों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि भारत आने के बाद यहां की संस्कृति और खानपान को समझना उनके लिए एक नया अनुभव था। भारतीय व्यंजनों से उनका परिचय तंदूरी चिकन के स्वाद के साथ हुआ था।
अपने संस्मरण में सोनिया बताती हैं कि शादी के बाद जब वह राजीव गांधी के साथ भारत आईं, तब उन्होंने पहली बार तंदूरी चिकन चखा। इसका गहरा लाल रंग, भुना हुआ स्वाद और तीखापन उनके लिए बिल्कुल नया था। उन्होंने लिखा कि पहली बार तंदूरी चिकन खाते समय मिर्च के कारण उनका मुंह जलने लगा था। हालांकि, धीरे-धीरे भारतीय मसालों और व्यंजनों का स्वाद उन्हें पसंद आने लगा।
भारतीय खानपान का हिस्सा बनने के साथ ही उन्होंने यहां की पारिवारिक भोजन परंपराओं को पूरी तरह से अपनाया। उनके रोजमर्रा के खाने में चावल, रोटी, सब्जियां और मटन, मछली या चिकन शामिल हो गए। इसमें अरहर की दाल ऐसी चीज थी, जो नियमित भोजन का अहम हिस्सा बन गई।
सोनिया गांधी ने भारतीय साड़ी के प्रति अपने आकर्षण का जिक्र किया है। उन्होंने भारतीय साड़ी को दुनिया के सबसे सुंदर और शालीन परिधानों में से एक बताया। हालांकि, साड़ी को खुद पहनना उनके लिए शुरुआत में आसान नहीं था। अपनी सगाई के दौरान उन्होंने जेड ग्रीन और हल्के पीले रंग का परिधान चुना था, इस परिधान को कई सेफ्टी पिन की मदद से संभाला गया था।
उनकी शादी की साड़ी का संबंध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से भी जुड़ा था। सोनिया गांधी ने बताया कि उनकी शादी में पहनी गई साड़ी का कपड़ा उन धागों से तैयार हुआ था, जिन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जेल में रहते हुए अपने हाथों से काता था।
पुस्तक में सोनिया गांधी ने इटली में युद्ध के बाद बीते बचपन, राजीव गांधी से प्रेम और विवाह तथा भारतीय सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका तक का सफर समेटा है। वर्ष 1965 में कैम्ब्रिज में 19 वर्षीय सोनिया की मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। दोनों ने 25 फरवरी 1968 को विवाह किया। संस्मरण में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या जैसे जीवन के कठिन और दुखद अध्यायों का भी उल्लेख किया गया है। यह किताब उनके निजी अनुभवों के साथ भारत से उनके भावनात्मक जुड़ाव की कहानी भी प्रस्तुत करती है।