(नई दिल्ली) अब रूठों को मनाने में जुटी कांग्रेस, सिंधिया के करीबी को बनाया जा सकता है डिप्टी सीएम

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नई दिल्ली (ईएमएस)। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में सीएम के तौर पर भूपेश बघेल के नाम पर मुहर लगाकर राज्य में ओबीसी समुदाय को साधने का प्रयास किया है। छत्तीसगढ़ में ओबीसी समुदाय निर्णायक संख्या में है और रमन सिंह के कार्यकाल में अपने को काफी उपेक्षित महसूस कर रहा था। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ और राजस्थान में अशोक गहलोत को सीएम पद का भार सौंपा है। इन मामलों में कांग्रेस आला कमान ने अनुभव और पार्टी के विभिन्न गुटों के बीच समन्वय कायम करने की क्षमता के आधार पर ही इनका चयन किया गया है। गहलोत की नियुक्ति पर असंतुष्ट हुए सचिन पायलट को मनाने के लिए उन्हें गहलोत का डिप्टी बनाया गया। इसी तरह मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी दूर करने के लिए अब मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को साधने के लिए भी कांग्रेस कोई प्रयोग कर सकती है।
तीनों राज्यों में सीएम चुनने के बाद अब कांग्रेस उन नेताओं को साधने में जुट गई है, जो ताजा नियुक्तियों से नाराज हुए हैं। ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पद सौंप कर संतुष्ट करने की योजना बनाई जा रही है। हिंदी पट्टी के इन तीन अहम राज्यों को कांग्रेस अब आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अहम मानकर चल रही है। तीनों राज्यों से लोकसभा की 65 सीटें आती हैं। कांग्रेस यहां अपना मजबूत प्रभाव बनाए रखती है तो 2019 की लड़ाई में वह मजबूती से डट सकती है। 2014 में इन तीनों ही राज्यों में भाजपा ने एक तरह से क्लीन स्वीप ही कर दिया था। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश से सबसे अधिक फायदा हो सकता है, जहां सिंधिया की सीएम पद की महत्वाकांक्षा के बाद भी संगठन में एकता नजर आ रही है।
यहां भाजपा ने विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर दी थी, ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए वह भी कमर कस रही है। कांग्रेस को 15 साल बाद सत्ता में लौटी है और कार्यकर्ता उत्साहित हैं। इसके अलावा वह किसानों के कर्जमाफी जैसे फैसलों से भी 2019 की राह आसान करने की जुगत में है।
कमलनाथ के पक्ष में राजी होने पर सिंधिया के प्रति पार्टी हाईकमान का भरोसा बढ़ा है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब उन्हें साधने के लिए राज्य इकाई का अध्यक्ष बना सकती है या फिर राष्ट्रीय महासचिव का पद दिया जा सकता है। यह भी माना जा रहा है कि सिंधिया अपने किसी करीबी के नाम की सिफारिश डिप्टी सीएम के तौर पर कर सकते हैं। इसके उलट राजस्थान में कांग्रेस को सचिन पायलट को सीएम पद न दिए जाने के चलते नुकसान की आशंका है।
अनिरुद्ध, ईएमएस, 17 दिसंबर 2018

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