श्री गिरिराज वंदना
स्याम सरूपा नील मनि,हुलसत हिये हिलोर। दिव्य सिला मुद मंगली,मन नाचत बनि मोर।। चौंर ढुरत वृक्षावली,सीस मुकुट धरि धौर। दरस-परस सेवत सकल, भक्त-संत ब्रज पौर।। कृष्ण कांति कन-कन निरखि,हरखि करहिं श्रुति गान धेनु चरावत ग्वाल छवि,दरसत सिद्ध सुजान।। नमन पुरंदर मेघ बनि,पूजें अचल […]
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