बुलबुले में कैद !

” मनुष्य का जीवन पानी के बुलबुले जैसा है। कब सांसे थम जाए कुछ कह नहीं सकते”। शर्माजी घर आए मेहमानों से सत्संग करने लगे। सभी बड़ी तल्लीनता शर्माजी की बातें सुन रहे थे। अचानक शर्माजी को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हड़कंप मच गया। डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में भर्ती कर दिया।

 डॉक्टर को शर्माजी बोले ” मैं तो अच्छा भला चंगा बातचीत कर रहा था। अचानक सांस लेने में तकलीफ क्यों होने लगी “? डॉक्टर बोले “आपकी पूरी जांच होगी फिर मालूम पड़ेगा आखिर हुआ क्या है “?

                             शर्माजी को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया । आधी रात को अस्पताल में हो-हल्ला होने लगा । ऑक्सीजन की कमी की अफवाह फैलने लगी। अफवाह सुनने के बाद शर्माजी की धड़कन बढ़ने लगी। उन्हें बेचैनी महसूस होने लगी । वे बार-बार ऑक्सीजन सिलेंडर से कनेक्ट ऊपर टंगे पानी के जार में उठ रहे बुलबुले देखने लगे। बेटे राकेश ने पास खड़े ड्यूटी डॉक्टर को कहां ” शायद पापा को ऑक्सीजन की कमी हो रही है ।बहुत घबरा रहे हैं। सुना है हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी भी हो गई है”।

                            डॉक्टर ने ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे बीमार शर्माजी को कहा ” ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है ।आप एकदम ठीक हैं। अनावश्यक टेंशन मत लीजिए। नली के ऊपर देखिए, पानी के बुलबुले स्पष्ट नजर आ रहे हैं”

                              थोड़ी देर में माहौल शांत हो गया । रात में शर्माजी चैन की नींद सोए। सुबह-सुबह उन्हें फिर सांस लेने में तकलीफ हुई। वे टकटकी लगाकर पानी के बुलबुले देखने लगे। उनकी सांसे बुलबुले में कैद हो गई ।

# रमेश चंद्र शर्मा 

  16 कृष्णा नगर – इंदौर