जुल्फों के कंडीशनर में थूक के एक्सपेरिमेंट

  वह थूकना भी क्या थूकना जो अफसाना बन जाए और उस अफसाने को लोग गली-कूचों में राजनैतिक चौबारे में, चिकारा बजा-बजा कर मजे से खूब गाते फिरे और उनके गाने पर तमाम लोग नाक भौं मुंह सिकोड़ते फिरे। तमाम लोग तमाम तरह की कहानियां, उस पर गढ़ते-मढ़ते फिरे।

     बडे़-बुजुर्ग कहते हैं कि ऐसा काम हरगिज न करो कि जिससे चार लोग थूकें और उस थूके पर जिसकी नजर पड़े फिर वह भी उस पर थूकता चला जाए।यानि कायदे की थुक्का फजीहत करता चला जाए। वैसे पान मसाला खाने वाले कहीं भी थूक कर अपनी पच्चीकारी और कलाकारी के अजब-गजब नमूने पेश करते ही रहते हैं,थूकदान रखना कभी रईसी-नवाबी शान समझी जाती थी, जो आजकल के पान मसाला-गुटखा खाकर इधर-उधर थूक कर आधुनिक कलाकृतियां बनाने वाले कंगले कलाकारों के बस की बात नहीं।

     बालों को नरम, मुलायम, रेशमी बानाने के लिए तरह-तरह के बाजार में तेल हैं, शैम्पू हैं,कंडीशनर है,दादी अम्मां के नुस्खों वाली तमाम पुस्तकें हैं। तमाम एप्स और यूट्यूब चैनलों पर तमाम गुरुओं का सुनने-गुनने-झेलने के लिए कई किस्म का गड़बड़झाला है,लेकिन थूक के साथ कंडीशनर के प्रयोग से बेतरतीब बालों को सुधार कर मुलायम और सिल्की बनाया जा सकता है, जब एक जनाब को यह विज्ञापन करते देखा तो मैं वैसे ही हैरान हो गया जैसे कोरोना के नये वैरिएन्ट ओमिक्रॉन को देख कर लोग हैरान-परेशान हैं। थूक के साथ अपने कंडीशनर का प्रचार, कुछ जनानियों के बालों पर करने वाले जनाब ने सोचा, मेरे इस नये एक्सपेरिमेंट को लोग खूब अपनी सर आंखों से सराहेंगे-सहेजेंगे।अपनी सिद्धि-प्रसिद्ध के बल पर, अपने इस प्रोडक्ट का नाम होगा। नाम होगा तो खूब दाम होगा और फिर दुनिया भर में खूब दुकानदारी होगी। लेकिन निहायत शरीफ किस्म कुछ लोगों ने थूक के साथ कंडीशनर प्रयोग से बाल साइन और सिल्की बनाते हुए, उन जनाब का वीडियो ऐसा वायरल कर दिया कि उन जनाब की गली-गली में थुक्का फजीहत होने लगी। जनाब को थूकदान याद आ गया, वो भी नवाबों के जमाने वाला। अब वो जनाब बस अपनी खुदा से खैर मना रहे कि किसी तरह मरे सांप की तरह उनके गले में लटकता वह वायरल वीडियो का दर्द, उनसे बेबफा सनम सा जुदा हो जाए ताकि नाम बडे़ दर्शन थोडे़ वाली कहावत का टैग उनके माथे से हमेशा-हमेशा के लिए मिट जाए।

-सुरेश सौरभ

निर्मल नगर लखीमपुर खीरी 

उत्तर प्रदेश

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