:: खंडवा रोड़ स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय सभागार में हुई शिव भजन संध्या ::
:: ‘ओम नम: शिवाय मंत्र’ का किया ध्यान, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के उद्देश्य से भी अवगत कराया ::
इन्दौर । शंभू तेरी माया…कहीं धूप कहीं छाया… शिव कैलाशों के वासी… मेरा भोला हैं भंडारी… शिव समाए… जैसे भजनों से देवी अहिल्या सभागार गूंजता नजर आया। हजारों की संख्या में श्रोताओं के बीच जब बाबा हंसराज रघुवंशी ने शिव भजनों की प्रस्तुति दी तो सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। हजारों युवाओं के साथ इन्दौर शहर के गणमान्य नागरिकों से सभागार गुलजार नजर आया। शिव आराधना में सभी श्रोता रमते गए। बाबा हंसराज रघुवंशी ने अपनी आवाज से श्रोताओं बांधे रखा। एक के बाद एक जैसे ही उन्होंने शिव भजनों की प्रस्तुति दी वैसे युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था। बाबा हंसराज रघुवंशी का प्रिय भजन शिव समाए… उन्होंने जैसे ही गाया श्रोताओं ने भी तालियों की गडग़ड़ाहट से पूरा सभागार गूंजा दिया।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन इन्दौर ईकाई से जुड़े नानूराम कुमावत ने बताया कि खंडवा रोड़ स्थित देवी अहिल्या सभागार में ख्यात भजन गायक बाबा हंसराज रघुवंशी की भजन संध्या का आयोजन किया गया। भजन संध्या की शुरूआत के पूर्व ú नम: शिवाय मंत्र का ध्यान किया गया। वहीं इसके पश्चात अंकित अग्रवाल ग्रुप की बालिकाओं ने गनेध वंदना की प्रस्तुति से सभी को मन मोह लिया। वहीं इस अवसर पर दिव्य प्रेम सेवा मिशन के कार्यों और सेवा गतिविधियों के बारे में सभी को जानकारी दी गई। दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा आयोजित शिव भजन संध्या में मुरलीधर राव, नानुराम कुमावत, रमेश मैंदोला, हनुमानसिंह मेहता, मोहनलाल मंगल, मदनलाल गरोठवाले, हनुमानसिंह मेहता, सोहनलाल मंगल, आर.आर. शर्मा, वासुजी टिवडेवाल, कैलाश कुमावत, छत्तरसिंह भाटी, आर.आर. गुप्ता, सोमजी मित्तल, हेमंत जायसवाल, संजीव सक्सेना सहित बड़ी संख्या में शिव भक्त शामिल हुए थे।
:: मेरे चाहने वाले ही मेरे भगवान हैं : हंसराज रघुवंशी
शिव भगवान की साधना व आराधना अगर भक्तों ने कर ली और शिवजी को ही अपना सर्वस्त्र न्यौछावर कर दिया तो उस भक्त पर शिवजी की कृपा हमेशा बनी रहती है। मैंने अपनी संगीत की दुनिया में संगीत से पहले भगवान शिव को माना है और आज शिव कृपा से ही मेरे चाहने वालों की कोई कमी नहीं है। मेरी आस्था जितनी शिवजी पर हैं उतनी ही मेरे फैंस के लिए भी है। मेरे चाहने वाले को भी में भगवान का ही दर्जा देता हूं। यह विचार शिव साधक बाबा हंसराज रघुवंशी ने पत्रकारवार्ता में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने अपनी कठिन परिश्रम से लेकर कामियाबी की बुलंदी तक पहुंचने तक का सफर भी सभी के समक्ष साझा किया। उन्होंने कहा कि 2011 से 2019 तक जीवन संघर्ष में बीता। कॉलेज पढ़ाई के दौरान का किस्सा साझा करते हुए कहा कि जीवन एक संघर्ष हैं। जो व्यक्ति इस संघर्ष से जीतना लड़ेगा वह कामियाबी की बुलंदी तक पहुंचेगा। उन्होंने उनके कॉलेज का किस्सा बताते हुए कहा कि उतार-चढ़ाव सभी के जीवन में आते हैं। मैं कॉलेज समय में जिस कैंटिन में घंटों अपना समय बिताता था वहीं मुझे कैंटिन में कार्य करना पड़ा। वहां कार्य करने से मन में कई ख्याल आते थे। जिन जूनीयरों के समक्ष हम घूमते थे आज उसी कैटिंन में काम करना अच्छा नहीं लगता था। लेकिन संघर्ष का वह दौर समय के साथ-साथ बितता गया। सिंगिंग का शोक बहुत कम उम्र से ही लग गया था और मैंने इसी में अपने कॅरियर की शुरूआत की। भगवान शिव की साधना ने ही मुझे आज सभी के दिलों में जगह दी है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने अपने गायक भजनों के कुछ मुखड़े भी सुनाए। जिसको सभी प्रशंसकों व पत्रकारों ने खूब सराहा।
:: सोशल मीडिया के साथ देशवासियों का मिला साथ ::
उन्होंने अपनी कामियाबी को साझा करते हुए कहा कि संगीत की दुनिया में आज जो कुछ भी हूं वह शिव भगवान की कृपा से हूं और आगे भी मैं भगवान शिव के भजनों को ही गाना ज्यादा पसंद करूंगा। सोशल मीडिया ने जहां मुझे प्रसिद्धि दिलवाई हैं वहीं देशवासियों ने शिव भजनों को पसंद कर मुझे अपने दिल में जगह दी है।
:: सेवा के 25 प्रकल्प ::
दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम ने कहा कि सेवा, साधना और संबोधि के भाव को लेकर दिव्य प्रेम सेवा मिशन समाज में गत 25 वर्षों से कार्य कर रहा है। जहां सेवा के एक दो नहीं बल्कि 25 प्रकल्प चल रहे हैं और उनसे हजारों-लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। हरिद्वार में गरीब बच्चों के लिए विद्यालय है, छात्रावास है, भोजनालय है और अब एक ध्यान मंदिर बनने जा रहा है। इसी वर्ष एक करोड़ 61 लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग का पूजन अभिषेक, अर्चन कर अभिषेक किया गया। सभी सेवा कार्य शिवभाव से हो रहे हैं।