पीलिया रोग और उसके घरेलू उपचार

विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन
पीलिया,कामला या जॉन्डिस रोग पानी। खाद्य सामग्री के संक्रमण से होता हैं। यह रोग अधिकतर बरसात में होता हैं उसका कारण वर्षा के कारण पानी प्रदूषित होकर,संक्रमण कर रोग को आमंत्रित करता हैं। वैसे जो व्यक्ति खून की कमी या एनीमिया रोग से पीड़ित होने प् पित्तप्रकोपक द्रव्यों का अधिक मात्रा में सेवन करता हैं तो उसका बढ़ा हुआ पित्त रक्त और मांस को दग्धकर कामला रोग को उत्पन्न करता हैं।
लक्षण — पीलिया के रोगी के नेत्र हरदी के समान पीले हो जाते हैं। त्वचा,मुख,नख का वर्ण भी हरदी के समान पीला हो जाता हैं। मल,मूत्र रक्तमिश्रित पीले वर्ण की निकलती हैं। रोगी का शारीरिक वर्ण बरसाती मेंढक के समान पीला हो जाता हैं उसकी इन्द्रियां अपने विषयों को ग्रहण करने में असमर्थ हो जाती हैं। वह व्यक्ति दाह,अपचन,शरीर में शिथिलता , अरुचि से विशेष पीड़ित होता हैं। इसके दो भेद होते हैं।
कभी-कभार प्राणघातक पीलिया साबित होने वाली पीलिया का ईलाज सम्भव और सुलभ है. पीलिया होने पर सबसे ज्यादा जरूरी है फौरी चिकित्सीय सलाह. हालांकि, उन घरेलू उपायों की भी कमी नहीं है जिससे पीलिया से राहत मिल सकती है..
अनार के पत्तों को छाया में सुखा लें. सूखे पत्तों को कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें. सेहत पर पीलिया के नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिये रोजाना तीन-तीन ग्राम चूर्ण सुबह और शाम मट्ठे के साथ सेवन करने से पीलिया का खात्मा हो जाता है.
गन्ने के 100 ग्राम रस में 7 से 8 ग्राम आंवले का रस मिला लें। दिन में दो बार इसके सेवन से पीलिया रोग नष्ट हो जाता है।
पीलिया ग्रस्त बच्चे के गले में गिलोय की लता लपेटने से पीलिया की विभीषिकता कम हो जाती है.
गन्ने के 100 ग्राम रस में अमलतास के 5 ग्राम पीसे गूदे को मिलाकर पिलाने से पीलिया रोग से मुक्ति मिलती है.
नीम की 5 ग्राम छाल को जल में मिलाकर उबालकर क्वाथ बना लें. 50 ग्राम क्वाथ में शहद मिला दें. इसे दिन में दो-तीन बारे पिलाने से पीलिया से राहत मिलती है।
हल्दी का चूर्ण बना लें. उससे 5 ग्राम चूर्ण निकाल कर दही में मिला लें. हल्दी-चूर्ण और दही के इस मिश्रण के सवन से पीलिया से उबरा जा सकता है।
50 ग्राम मूली के रस में 5 से 7 ग्राम शक्कर मिलाकर पिलाने से पीलिया नष्ट हो जाता है.
बेल के पत्तों के 5 ग्राम रस में काली मिर्च के दो दानों को मिला लें। इसका चूर्ण बनाकर सेवन करें. पीलिया से लाभ मिलेगा।
इसके अलावा इसके इलाज़ में सतर्कता की जरुरत के साथ साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखे। उबला पानी का सेवन अतिआवश्यक होता हैं। इसके लिए पथ्य में शालिधान्य का भात,जाऊ,गेंहू,की रोटी,मुंग अरहर,मसूर की दाल खिलाना चाहिए। इसके आहार में यह ध्यान रखना जरुरी हैं की ऐसा आहार जिससे लिवर या यकृत पर अधिक बोझ पाचन करने में न पड़े। धान की लाई,मुरमुरा,मखाना,दे सकते हैं गन्ने का रस में सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए अन्यथा गन्ने की गरेड़ी चबाने के लिए देना लाभ दायक हैं।
दाड़िम घृत,द्राक्षा घृत,हरिद्रादि घृत उपयोगी होते हैं।
इसके अलावा फ़लत्रिकादि क्वाथ,कालमेघ नवायस,कामला हर रास,आरोग्यवर्धनी वती,कुमार्यासव भी लाभकारी होते हैं।