सच का मुँह
झूठ की आँख
क्या देखी है कभी।
सच का रुख
झूठ का रुख
क्या देखा है कहीं।
सत्य का सुख
झूठ का सुख
क्या भोगा है कभी ।
सत्य का रंग
झूठ का रंग
क्या स्वाद चखा है कभी।
सच का मुँह
सच का रूख
सच का सुख और
सच का रंग सदा
एक ही होता है
जिस प्रकृति में
जहाँ भी वह
वास करता है
अपनी पूर्णता के साथ
अपने होने का
जयघोष करता है।
झूठ झूठ होता है
झूठ का मुंख दैत्याकार
झूठ की आंखों में क्रूरता
झूठ का रुख बनावटी
झूठ का सुख तनिक आरामदेह
झूठ का रंग लोभ से भरपूर
जनता को भटकाने वाला है
पीव सत्य और झूठ का
भेद वाणी से मुखरित
आचरण से प्रकट होता है
वाणी स्वयं बोलती है
सत्य-झूठ का भेद खोलती है।
आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार
श्रीजगन्नाथ धाम, काली मंदिर के पीछे, ग्वालटोली
नर्मदापुरम मध्यप्रदेश मोबाइल 9993376616