मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी बोले- गर्मी में देशी पेय अपनाएं

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युवा एथलीटों की उपलब्धि पर जताया गर्व
-नीदरलैंड से लौटीं 1000 वर्ष पुरानी चोलकालीन ताम्रपट्टिकाओं का किया जिक्र
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में देशवासियों से भीषण गर्मी और हीटवेव के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में इस समय तेज गर्मी पड़ रही है और लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में निकलते समय सतर्क रहने तथा सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि भारतीय परंपरा में गर्मी से राहत पाने के अनेक प्राकृतिक उपाय मौजूद हैं और देशी पेय पदार्थ इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने उत्तर भारत के आम पन्ना, पंजाब-हरियाणा की लस्सी, राजस्थान-गुजरात की छाछ, बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सत्तू शरबत, कोंकण और गोवा के कोकम शरबत व सोल कढ़ी तथा दक्षिण भारत के पानकम, नीर मोर और सम्बारम जैसे पेय पदार्थों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये पेय केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा से भी जुड़े हुए हैं।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भारतीय एथलेटिक्स की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा, जो भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने युवा धावकों गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर की विशेष रूप से सराहना की। गुरिंदरवीर सिंह ने रांची में आयोजित फेडरेशन कप सीनियर नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 10.09 सेकेंड का समय निकालकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और देश के सबसे तेज धावक बने।
आम उत्पादक किसानों की प्रशंसा की
प्रधानमंत्री ने आम के मौसम का उल्लेख करते हुए देश के विभिन्न क्षेत्रों में मिलने वाली आम की विविध प्रजातियों की चर्चा की। उन्होंने महाराष्ट्र के हापुस और अल्फांसो, गुजरात के केसर, उत्तर प्रदेश के दशहरी और लंगड़ा, दक्षिण भारत के बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम तथा पश्चिम बंगाल के हिमसागर आम का जिक्र किया। उन्होंने आम उत्पादक किसानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय आम अब वैश्विक बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहा है।
नीदरलैंड यात्रा का किया उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड की अपनी हालिया यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां से चोल काल की 1000 वर्ष से अधिक पुरानी 24 ताम्रपट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गई हैं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्रपट्टिकाएं शामिल हैं। इन अभिलेखों में राजा राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोल के वचन को पूरा करने तथा एक बौद्ध विहार को भूमि दान देने का उल्लेख मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये ताम्रपट्टिकाएं उस काल की शासन व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।