राजकुमार हिरानी की कहानियों की आत्मा हमेशा संगीत से जुड़ी रही है

मनोरंजन

दशकों से राजकुमार हिरानी की कहानियां अपनी गर्मजोशी, हास्य और यादगार किरदारों के लिए दर्शकों के दिलों पर राज करती आई हैं। अब ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ इसी विरासत को आगे बढ़ाता नजर आ रहा है। 

प्रीतम एंड पेड्रो: रिलीज़ से पहले ही संगीत ने जीता दिल

3 जुलाई को जियोहॉटस्टार पर रिलीज़ होने वाली *’प्रीतम एंड पेड्रो’* ने प्रीमियर से पहले ही अपने संगीत के जरिए दर्शकों का दिल जीतना शुरू कर दिया है। हाल ही में रिलीज़ हुए इसके गानों को सोशल मीडिया पर खूब प्यार मिल रहा है। उनकी सादगी, गर्मजोशी और आसानी से जुबान पर चढ़ जाने वाली धुनें लोगों को पसंद आ रही हैं।

इस उत्साह को और बढ़ाता है “कभी किसी से माफी मांग लो”, जिसे श्रेया घोषाल ने अपनी भावपूर्ण आवाज़ दी है। सीरीज़ में मोना सिंह एक गायिका की भूमिका निभा रही हैं, जिससे संगीत कहानी और उनके किरदार का अभिन्न हिस्सा बन जाता है। 

3 इडियट्स: ज़िंदगी के हर दौर को समझने वाले गीत

बहुत कम हिंदी फिल्मों के गाने ऐसे हैं जो ‘3 इडियट्स’ के गीतों जितने सार्वभौमिक और आज भी प्रासंगिक हों। “ऑल इज़ वेल” सिर्फ एक सुपरहिट गाना नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा जुमला बन गया जिसे लोग आज भी तनाव या मुश्किल हालात में खुद को दिलासा देने के लिए दोहराते हैं।

वहीं “गिव मी सम सनशाइन” ने लाखों छात्रों के सपनों, संघर्षों और उम्मीदों को आवाज़ दी। वर्षों बाद भी यह गीत उतना ही असरदार लगता है क्योंकि इसकी भावनाएं आज भी हर पीढ़ी से जुड़ती हैं। 

संजू: जब संगीत बन गया ज़िंदगी का सबक

‘संजू’ के सबसे भावुक पहलुओं में से एक है संजय दत्त और उनके पिता सुनील दत्त का रिश्ता। फिल्म में संगीत केवल पुरानी यादों का हिस्सा नहीं बनता, बल्कि जीवन के मूल्यों का प्रतीक बन जाता है। सुनील दत्त (परेश रावल) संगीत के संदर्भों के जरिए संतुलन, अनुशासन और भावनात्मक समझ जैसे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं। यह दिखाता है कि कई बार सबसे गहरी सीख शब्दों से नहीं, बल्कि संगीत के जरिए मिलती है।

पीके: मासूमियत को सुरों में पिरोती कहानी

‘पीके’ ने आस्था, पहचान और इंसानियत जैसे गंभीर विषयों को बेहद मासूम अंदाज़ में पेश किया और इसका संगीत भी उसी भावना को दर्शाता है। “लव इज़ ए वेस्ट ऑफ टाइम” और “भगवान है कहाँ रे तू” जैसे गीत केवल कहानी को आगे बढ़ाने के लिए नहीं थे, बल्कि उन्होंने दर्शकों को पीके की मासूम जिज्ञासा और भावनात्मक सफर को महसूस कराया। यहां भी राजकुमार हिरानी ने संगीत को कहानी कहने का एक प्रभावशाली माध्यम बनाया।

डंकी: जब संगीत ने घर की कसक को आवाज़ दी

‘डंकी’ में संगीत सपनों और बिछड़ने के दर्द के बीच एक भावनात्मक पुल बनकर उभरता है। “निकले थे कभी हम घर से” उन लोगों की उम्मीद, त्याग और अपने घर से दूर जाने की पीड़ा को बेहद खूबसूरती से सामने लाता है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में अपना वतन छोड़ते हैं। यह गीत केवल कहानी का हिस्सा नहीं बनता, बल्कि दर्शकों को घर से दूर होने की टीस भी महसूस कराता है।