“आम का अचार बनाना एक पारंपरिक कला है ।
“आम का अचार “धूप और धैर्य से पकता है।
तथा इस आम के अचार में स्वाद सब्र और मौसम के तालमेल का होता है। आम का अचार सुनते ही हम चाहे कहीं पर भी क्यों ना हो सीधे अपने गांव पहुंच जाते हैं । अपनी मां दादी मां और नानी मां के पास” क्यों कि आम के अचार का असली पारंपरिक स्वाद तो वहीं मिलता है ।
तेल और मसालों का सही संगम तथा अचार बनाने की इस प्रक्रिया में आम का भी काफी योगदान होता है।
आम के बिना तो आम का अचार बनाना संभव ही नहीं है । नमक मिर्च मसालों का मेजरमेंट जितना परफेक्ट रहेगा अचार का स्वाद उतना ही अच्छा उभर कर आता है ।
बचपन में जब मां और दादी साथ मिल कर अचार बनाती थी। तो अचार के उन मसालों की खुशबू पूरे मुहल्ले भर में फैल जाती थी और हमारी तो समझों चांदी हो जाती थी ।
आधी अचार तो हमलोग बनने से पहले ही खत्म कर दिया करते थे । तो चलिए शुरु करते हैं वहीं मां दादी नानी के हाथों जैसा स्वाद वाला सबका पसंदीदा “आम का अचार “
आम के अचार का मसाला
1 किलो कच्चा खट्टा आम
50 ग्राम सरसों (दरदरी कुटी हुई)
25 ग्राम मेथी दरदरी पिसी हुई
25 ग्राम सौंफ
25 से 30 ग्राम हल्दी पाउडर
100 ग्राम धनिया पाउडर
50 से 60 ग्राम लाल मिर्च पाउडर
10 ग्राम अजवाइन
10 ग्राम कलौंजी
2 तेज पत्ता
1/4 छोटी चम्मच हींग
300 ग्राम सरसों का तेल
100 ग्राम नमक या स्वादानुसार
अचार को पकने में थोड़ा अधिक समय लगता है ।
क्यों कि आम को बड़े बड़े टुकड़ों में काटा जाता है और इसे आराम से पकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
वैसे आम का अचार बनाने में मेहनत काफी ज्यादा करना पड़ता है पर खाकर मज़ा भी तो बहुत ज्यादा आता है।
आम का अचार के नाम से मुझे मेरे सासू जी की याद आ जाती है । उनके हाथों से बनाई गई अचार का स्वाद बहुत ही गजब का होता है । वो बहुत बढ़िया अचार बनाती है। मैं उनके जैसा अचार तो नहीं बना पाती हूं मगर कोशिश करती हूं की अच्छा बना सकूं ।।
हमारे यहां तो मानसून कब का आ गया और बरसात भी शुरु हो गयी है । मैं सोच ही रही थी कि अभी धूप है तो थोडा़ अचार बना कर रख लेती हूं पर समय के अभाव में
अचार बनाना यह गया । हाल तो ये था कि अब तो मेरे दिमाग से अचार बनाने का ख्याल भी निकल चुका था । क्यों कि बारिश शुरु हो गई थी । फिर तीन चार दिन पहले हमारे एक पड़ोसी ने अपने बेटे के हाथों लगभग एक किलों के आस पास कच्चा आम भेज दिया और वो भी अपने बगान का ..!! आम देख कर मेरा मन ललच गया । आम इतने सुंदर कच्चे हरे हरे थे कि मुझ से रहा नहीं गया और मैंने सुबह सुबह ही सभी आमों को अच्छी तरह से धोकर टुकड़ों में काट लिया और फिर पानी से धोकर उसे एक डलिया में निकाल कर सुखने के लिए छत पे रख दिया । अब धूप तो था नहीं पर हवा बहुत तेज थी तो आम के टुकड़ों का पानी जल्दी ही सुख गया । सिर्फ पानी ही सुखाना था तो ज्यादा समय भी नहीं लगा । उसके बाद उन आम के टुकड़ों को एक पतीले में डाल कर उस में हल्दी व नमक डाल कर अच्छी तरह से मिक्स कर दिया
और ढक कर रात भर के लिए छोड़ दिया । नमक और हल्दी की वजह से आम के टुकड़ों में नमी आ गई और पानी भी छुट गया । अब पानी सुखने तक इन्हें धूप में सुखाना होता है पर हमारे यहां से तो धूप ही गायब थी।
पर किसी तरह से सुखाना तो था फिर मैंने क्या किया कि
आम के टुकड़ों को पानी से निकाल कर थाली में फैला कर पंखे के नीचे रख दिया । हवा की वजह से धीरे धीरे आम के टुकड़ों से पानी सुख गया । अभी के लिए बस इतना ही धूप दिखाना था । पर कोई बात नहीं बिना धूप के भी काम चल गया मगर धूप लगने से और अच्छा बन सकता था । फिर कढ़ाई में धुआंधार तेल गरम करके गैस बंद कर दिया और जब तेल सिर्फ गर्म रह गया तब उस में हींग और सभी सूखे मसाले डाल कर अच्छी तरह से मिला लिया और फिर उस मसालों के मिश्रण को आम के टुकड़ों में डाल कर करछी की सहायता से मिक्स कर दिया और धूप में रख दिया । अभी थोड़ी थोड़ी धूप कभी कभी छत पे आने लगी थी । दिन में दो से तीन बार अचार को करछी की सहायता से उलटते पलटते रहे। इस से मसालें आम के टुकड़ों में भीतर तक जाते हैं और अचार अच्छी तरह से पक कर स्वादिष्ट बनते हैं। कम से कम तीन से चार दिन की अच्छी धूप अचार में उलट पलट कर लगाने से अचार का सेल्फ लाइफ बढ़ जाता है और अचार सालों तक खराब नहीं होते हैं ।
अच्छी तरह धूप लगाने के बाद अचार को किसी साफ सुथरी बरनी में भर कर रख लें और अचार के ऊपर से इस वक्त थोड़ी और मात्रा में सरसों तेल डाल कर बरनी का ढक्कन बंद कर दें ।। दिन में एक दो बार बरनी को हिला डुला दें और ढक्कन भी हल्का सा खोल दिया करें ।
और हो सके तो थोड़ी धूप और दिखा दें ।।
ध्यान रहें अचार को कभी गीले हाथों से ना छुए,
नही तो अचार सड़ जाएगे …..!! तो तैयार है बहुत ही स्वादिष्ट मां दादी नानी के हाथों वाले स्वाद के साथ “आम का अचार ” और ये अचार सिर्फ देखने में ही नहीं बल्कि खाने में भी बेहद स्वादिष्ट है।।
किरण काजल बेंगलुरु

