बेटा बैंक मैनेजर की कुर्सी छोड़ बना भाजपा का सिपाही, अब वक्फ बोर्ड में एंट्री दिग्विजय सिंह के पारिवारिक मित्र के बेटे अनिमेष बने मप्र वक्फ बोर्ड के सदस्य बैंक की नौकरी छोड़ 10 साल से कर रहे थे संगठन की सेवा
गुना । मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन के साथ देश में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का इतिहास बना है। इस ऐतिहासिक निर्णय में गुना जिले के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव का नाम भी शामिल है। खास बात यह है कि अनिमेष के पिता वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक भार्गव पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के वर्षों पुराने करीबी मित्र माने जाते हैं, जबकि अनिमेष ने अलग राजनीतिक राह चुनते हुए एचडीएफसी बैंक में मैनेजर की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ करीब एक दशक पहले खुद को पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया था। वर्षों तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं देने के बाद अब उन्हें मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन करते हुए इंदौर के सनवर पटेल को अध्यक्ष बनाया है। इसी बोर्ड में इंदौर के मनोज मालपानी और राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को गैर-मुस्लिम सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसा करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। पहले वक्फ बोर्ड में सदस्य बनने के लिए मुस्लिम समुदाय से होना अनिवार्य था, लेकिन संशोधित कानून के बाद प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है।
अनिमेष भार्गव ने वित्त प्रबंधन में एमबीए की शिक्षा प्राप्त की है तथा वित्तीय क्षेत्र में लगभग 18 वर्ष का अनुभव रखते हैं। वे एचडीएफसी बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे, लेकिन संगठनात्मक कार्यों के प्रति समर्पण के चलते उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ दी और भोपाल में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में पूर्णकालिक रूप से सक्रिय हो गए। पिछले लगभग दस वर्षों से वे प्रदेश कार्यालय में संगठनात्मक व्यवस्थाओं का संचालन, विभिन्न कार्यक्रमों के समन्वय और पार्टी की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वर्तमान में वे मध्यप्रदेश भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
राघौगढ़ से संबंध रखने वाले अनिमेष भार्गव का राजनीतिक सफर भी रोचक रहा है। करीब एक दशक पहले उन्होंने राघौगढ़ नगर पालिका चुनाव में भाजपा से टिकट की दावेदारी की थी, हालांकि उस समय उन्हें मौका नहीं मिल सका। इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति की बजाय संगठन को मजबूत करने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। उनकी कार्यशैली और निरंतर सक्रियता ने प्रदेश नेतृत्व का विश्वास जीता, जिसका परिणाम अब वक्फ बोर्ड की सदस्यता के रूप में सामने आया है।
उल्लेखनीय है कि अनिमेष भार्गव ऐसे परिवार से आते हैं, जहां उनके पिता अशोक भार्गव का पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से 1975 से गहरा व्यक्तिगत संबंध और मित्रता रही है। इसके बावजूद अनिमेष ने शुरू से ही भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के साथ स्वयं को जोड़ा और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। राजनीतिक गलियारों में उनकी नियुक्ति को संगठन के प्रति वर्षों की निष्ठा और समर्पण का प्रतिफल माना जा रहा है। नए वक्फ बोर्ड में अध्यक्ष सनवर पटेल के अलावा नजमा हेपतुल्ला, आतिफ अकील, फैजान खान, फातेमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान, शबाना खान, मनोज मालपानी, अनिमेष भार्गव तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त को सदस्य बनाया गया है। देश में पहली बार गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के कारण यह बोर्ड राष्ट्रीय स्तर पर विशेष चर्चा का विषय बन गया है।

