समोसे के लिए ट्रेन रोकने का दावा गलत, राऊ में इंजीनियरिंग कार्य के कारण रुकी थी मालगाड़ी

इंदौर

पश्चिम रेलवे का फैक्ट चेक- इंदौर-महू डेमू नहीं, सीजीपीटी की मालगाड़ी थी; अधिकृत ठहराव के दौरान भोजन लेने गया था सहायक लोको पायलट ::
इंदौर । इंदौर-महू रेलखंड पर लोको पायलट ने समोसे लेने के लिए ट्रेन रोक दी के वायरल दावे ने बुधवार को सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी। वीडियो वायरल होने के बाद रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, लेकिन पश्चिम रेलवे ने आधिकारिक फैक्ट चेक जारी कर पूरे मामले की तस्वीर साफ कर दी। रेलवे ने कहा कि वायरल वीडियो यात्री डेमू ट्रेन का नहीं, बल्कि राऊ यार्ड में निर्धारित इंजीनियरिंग कार्य के कारण रुकी एक मालगाड़ी का है।
पश्चिम रेलवे के अनुसार, लोको नंबर 27237 और 27600 से संचालित सीजीपीटी मालगाड़ी को राऊ होम सिग्नल पर यार्ड में चल रहे निर्धारित इंजीनियरिंग कार्य के कारण पहले ही रोका गया था। यह ठहराव परिचालन प्रक्रिया के तहत था और ट्रेन को भोजन या नाश्ता खरीदने के लिए नहीं रोका गया था।
:: अधिकृत ठहराव में भोजन लेने गया सहा. लोको पायलट ::
रेलवे ने बताया कि इसी ऑपरेशनल स्टॉप के दौरान सहायक लोको पायलट पास की दुकान से भोजन खरीदता दिखाई दिया। रेलवे के अनुसार, अधिकृत ठहराव के दौरान हुई इस व्यक्तिगत गतिविधि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और ऐसा दिखाने का प्रयास किया गया कि ट्रेन केवल नाश्ता लेने के लिए रोकी गई थी, जबकि वास्तविक स्थिति अलग थी।
:: डेमू बताकर वायरल किया गया वीडियो ::
पश्चिम रेलवे ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वीडियो को गलत तरीके से इंदौर-महू डेमू यात्री ट्रेन से जोड़ा गया। जबकि घटना एक मालगाड़ी से संबंधित थी। रेलवे ने कहा कि वीडियो की चुनिंदा एडिटिंग और अधूरी जानकारी के कारण गलत धारणा बनी।
:: सोशल मीडिया पर तेजी से फैला था दावा ::
वायरल वीडियो में दावा किया गया था कि रंगवासा क्षेत्र के पास लोको पायलट ने ट्रेन रोककर गर्म समोसे खरीदे। वीडियो सामने आने के बाद यात्रियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने रेलवे संचालन पर सवाल उठाए थे। हालांकि, रेलवे के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वायरल दावे और वास्तविक घटना में अंतर था।
:: रेलवे की अपील- तथ्य जांचकर ही करें साझा ::
पश्चिम रेलवे ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो, पोस्ट या सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से अवश्य करें। रेलवे ने कहा कि भ्रामक जानकारी न केवल भ्रम पैदा करती है, बल्कि संस्थानों के प्रति अनावश्यक अविश्वास भी उत्पन्न करती है।