इस आर्टिकल के शीर्षक गीत को सुनते ही हिंदी फिल्मों के सदाबहार अभिनेता संजीव कुमार का दर्द भरा चेहरा आंखों के आगे झलक उठता है। संजीव कुमार के अभिनय में फिल्म ‘खिलौना’ के लिए मोहम्मद रफी का यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में दर्द भर देता है। 1970 की फिल्म ‘खिलौना’ संजीव कुमार की अनेक सुपरहिट और यादगार फिल्मों में एक है। यह फिल्म प्रसिद्ध उपन्यासकार गुलशन नंदा के उपन्यास ‘पत्थर के होंठ’ की कहानी पर आधारित थी और इस फिल्म में संजीव कुमार का अभिनय सभी सिने प्रेमियों का दिल दहला दिया था। संजीव कुमार के साथ इस फिल्म में मुमताज, जितेंद्र और शत्रुघन सिन्हा ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी ने इस फिल्म के सभी गीतों में सुमधुर संगीत देकर उन्हें सुपरहिट और सदाबहार बना दिया था। इस फिल्म के दो अन्य गीत ‘खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी’ और ‘मैं शराबी नहीं, मैं शराबी नहीं’ भी संजीव कुमार अभिनीत सदाबहार गीतों की श्रेणी में चिरस्थायी हो गए हैं। सभी गीतों को आनंद बख़्शी ने लिखा था।फिल्म खिलौना का निर्देशन चंदर वोहरा ने किया था और इस फिल्म का निर्माण एल वी प्रसाद प्रोडक्शन के बैनर तले हुआ था। 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में जन्मे संजीव कुमार का असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था और वे एक मध्यम वर्गीय ब्राम्हण परिवार से आते थे। उन्होंने 150 से अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया था और फिल्म ‘शोले’ की अपार सफलता के पीछे उनकी ठाकुर बलदेव सिंह की भूमिका काफी अहम थी। हिंदी फिल्मों के महान अभिनेता संजीव कुमार की मृत्यु 6 नवंबर 1985 को सिर्फ 47 वर्ष की उम्र में हो गई थी।
अनित कुमार राय टिंकू, बाघमारा, धनबाद।

