ट्रंप का ध्यान ईरान जंग पर, पीएम मोदी ने गुपचुप बना दिया 35 देशों का ग्रिड

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-यह भारत को क्रिटिकल और रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा
नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब से सत्ता में आए हैं, दुनिया में कहीं न कहीं हंगामा मचा हुआ है। जनवरी, 2025 में सत्ता संभालते ही ट्रंप ने पूरी दुनिया पर ट्रेड टैरिफ लगाकर हंगामा मचा दिया। इस साल फरवरी 2026 में ईरान के साथ जंग करके भारत समेत पूरी दुनिया को मुश्किल में डाल दिया लेकिन भारत के पीएम नरेंद्र मोदी जून 2024 में जब से तीसरी बार सत्ता में आए तो वह गुपचुप एक मिशन पर लगे हुए हैं। इसका नतीजा यह रहा कि बीते करीब दो साल में पीएम मोदी ने 35 देशों का एक ग्रिड बना लिया, जो भारत को क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौर में पीएम मोदी तीसरी बार सत्ता में आने के साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी नींव रख दी थी। उन्होंने अपने विदेशी दौरों के साथ चुपचाप इस मिशन को पूरा किया। पीएम मोदी ने भारत को 35 देशों के उस ग्रिड से जोड़ दिया, जिनके पास रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स हैं। हाल ही में पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई कि भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण में निवेश करेगा। इसका मकसद जरूरी मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी की सप्लाई चेन की मजबूती बहुत अहम है। अहम मिनरल्स और स्टील सेक्टर में सप्लाई चेन को और मजबूत करने के लिए एक जरूरी समझौता हुआ है, जैसे-जैसे साफ ऊर्जा और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की ओर दुनिया का झुकाव तेजी से बढ़ रहा है, रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक भू-राजनीति में एक अहम रणनीतिक संपत्ति के तौर पर उभरे हैं। ऐसे में भारत के बनाए इस ग्रिड की अहमियत बढ़ जाती है।
क्रिटिकल मिनरल्स ऐसे संसाधन हैं जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों के लिए जरूरी हैं। तांबा, लिथियम, निकिल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, एल्युमिनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन, चांदी के अलावा, रेयर अर्थ एलिमेंट के अलावा अन्य महत्वपूर्ण मिनरल्स शामिल हैं। ये क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, टेलीकम्युनिकेशन और डिफेंस जैसे सेक्टर में अहम भूमिका निभाते हैं और साथ ही कम-कार्बन वाली अर्थव्यवस्था की ओर वैश्विक बदलाव में भी मदद करते हैं। इन मिनरल्स की सप्लाई चेन में अक्सर रुकावटें आ सकती हैं, इसलिए देश इनकी भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन दुर्लभ मृदा समेत कई क्रिटिकल मिनरल्स के वैश्विक प्रसंस्करण में योगदान देता है। वहीं, प्रसंस्करण क्षमता का अनुमानित 80-90 फीसदी हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। वैश्विक कच्चे और प्रोसेस्ड क्रिटिकल मिनरल्स के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 17.6 फीसदी है। वहीं, भारत की हिस्सेदारी करीब 3.3 फीसदी है। रेयर अर्थ मिनरल्स की अहमियत बहुत बढ़ चुकी है। ये ऐसे खनिज हैं, जिनके दम पर ही आज स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस, एयरोस्पेस, स्पेस से लेकर न्यूक्लियर क्षेत्र के लिए जरूरी उपकरण बनाए जा सकते हैं। इन क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स के मामले में भारत ने अपना नेशनल मिशन शुरू किया है, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।