‘एलियन से दोस्ती’ रोचक विज्ञान कथा संग्रह 

साहित्य

पुस्तक: एलियन से दोस्ती

समीक्षक: शिव मोहन यादव

लेखक: डाॅ. उमेश चमोला

प्रकाशक: समय साक्ष्य, देहरादून

मूल्य: 125 रुपये

विज्ञान कथाएं आज के समय की मांग है और इस पर बेहतर काम करने वालों में डाॅ. उमेश चमोला एक उदीयमान रचनाकार हैं। पुस्तक का शीर्षक पहली नजर में ही आकर्षित करने वाला है, जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला है। इस पुस्तक में कुल 21 विज्ञान कहानियां संकलित हैं, जो बच्चों ही नहीं, बड़ों के भी काम की हैं। इन कहानियों में कुछेक छिटपुट पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हो चुकी हैं। पुस्तक की भूमिका लिखते हुए उत्तराखंड भाषा संस्थान के पूर्व उप-निदेशक डाॅ. नागेन्द्र ध्यानी ‘अरुण’ जी लिखते हैं कि लेखक डाॅ. उमेश चमोला न केवल विज्ञान के शिक्षक हैं, बल्कि हिंदी और गढ़वाली के लब्धप्रतिष्ठित लेखक और कवि हैं और साहित्य के सचेतक भी। उनकी रचनाओं का कई भाषाओं में अनुवाद भी हो चुका है। उन्होंने इस पुस्तक को कालजयी कृति तक बताया है।

अपनी बात में लेखक ने विज्ञान शिक्षक और प्रशिक्षक होने के अतिरिक्त, विज्ञान से अपनी घनिष्ठता का उल्लेख दर्शाया है। वे प्रयोगधर्मी शिक्षक हैं और इन रचनाओं को उन्होंने बारीकी से गढ़ा है। पहली ही कहानी रहस्य और रोमांच से भरपूर है- ‘भूतों की कोठी’। कहानी में जिस तकनीक की बात की गई है, वह बड़ों के लिए भी रोचक है। बताया गया है शरीर के मृत होने के बाद मस्तिष्क काम करता रहता है, जिसे कम ताप पर रखकर शोध भी किए जा रहे हैं।

‘जन्मदिन का सरप्राइज गिफ्ट’ एक मजेदार कहानी है जो गुणसूत्रों से संबंधित है। तीसरी कहानी का नाम है ‘अंगों की खेती’! लेखक ने अपनी काल्पनिक क्षमता का परिचय देते हुए कहानियों को रोचक ढंग से पिरोया है। कहानी पढ़कर प्रतीत होता है कि वैज्ञानिक भविष्य में किसानों की खेती की तरह अंगों को भी उगा सकते हैं। ऐसी बाल विज्ञान कथाओं की दरकार हमेशा रहेगी, जो बच्चों और बड़ों को सोचने पर विवश करें और उन्हें कल्पना लोक में ले जाए!

‘सीमा के रक्षक’ एक ऐसी कहानी है जो मानव शरीर की रक्त कणिकाओं के बारे में कल्पना और यथार्थ का मिश्रण बन पड़ी है। टेलीपैथी पर आधारित कहानी ‘अजनबी दुनिया और टेलिपेथिस्कोप’ भी नए ढंग से सोचने का रास्ता बुनती है। ‘रोबोट युग की बीमारी’ में रोबोटिक वल्र्ड के साथ मानवीय और मशीनी दुनिया का सामंजस्य है। इसमें जीवाणु-विषाणु और लैमार्क की थ्योरी का भी जिक्र मिलेगा।

‘पानी के चोर’ भी मजेदार और रोचक विज्ञान गल्प है। ‘कालघड़ी’ के माध्यम से दीपू कैसे भविष्य में पहुंच गया, इसका भी उल्लेख है। डाॅ. उमेश पात्रों के सपने के माध्यम से न जाने कैसी-कैसी विज्ञान कल्पनाओं को आकार दे जाते हैं। ‘बोलने वाला रोबोट’ भी बेहतर कहानी है, जो उपग्रह की कार्यप्रणाली को भी समझा जाती है। कैसे संकेतों को भेजा जा सकता है, इसकी भी जानकारी मिलती है।

‘एलियन से दोस्ती’ के माध्यम से सोनू उड़न तश्तरी देखकर उसमें एलियन को देखता है। उनके पास एक यंत्र था। एलियन विचित्र भाषा में कुछ पूछता है। बाद में दोनों के बीच संवाद होता है और दोस्ती हो जाती है। एक रोचक और रोमांचक कहानी! एलियन बताते हैं कि तश्तरी छोड़कर पूरा विमान पृथ्वी वासियों को दिखाई नहीं देता। बताते हैं कि वे विमान के चारों ओर अदृश्य प्रकाश का आवरण तैयार कर लेते हैं। सोनू के सोचने वाली बातें भी एलियन जान जाते हैं। अंततः कहानी स्वच्छता का संदेश भी देती है।

ऐसी रोचक, व्यवहारिक, काल्पनिक, शिक्षाप्रद विज्ञान और गल्प कथाओं की सदैव आवश्यकता रही है। विज्ञान कथाओं में ऐसा प्रयोग कुछ हटकर लगा। ऐसी गुंजाइश लगती है कि कहानियों में थोड़ा विस्तार और होना चाहिए था। कुछ कहानियों को जल्दी में समेट दिया गया है, यह थोड़ा खटकाव पैदा करने वाली स्थिति है।

– शिव मोहन यादव  सहायक संपादक,   प्रकाशन प्रभाग,   एनसीईआरटी कैंपस,

नई दिल्ली- 110016   मो. 9616926050